हिस्ट्रीशीटर प्रदीप पांडेय की बस्ती में पुलिस से मुठभेड़ में मारे जाने के बाद गगहा इलाके में उसके गांव सोनइचा में सन्नाटा है। उस पर गोरखपुर समेत अन्य जिले में 19 केस दर्ज हैं। अकेले गोरखपुर के कैंट, गगहा और बड़हलगंज में दर्ज कई मुकदमों में वह वांछित था। चोरी से उसने अपराध की शुरुआत की थी। कैंट से बाइक चोरी मामले में जेल जाने के बाद ही उसने गिरोह बना लिया था। उस पर दर्ज मुकदमे या तो चोरी के मामलों के हैं, या फिर लूट के।
पुलिस के मुताबिक 2010 में उसने अपराध की शुरुआत की थी। 20 साल की उम्र में पहली बार वह कैंट थाने से बाइक चोरी के मामले में जेल भेजा गया था। 2012 में बड़हलगंज में चोरी का केस दर्ज हुआ। तब उसके पास से तमंचा भी बरामद हुआ था। बड़हलगंज थाने से ही प्रदीप पर गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई भी हुई थी। 2013 में प्रदीप के खिलाफ कोतवाली में एक ही साल में चोरी के दो मुकदमे दर्ज हुए थे। उसके बाद 2015 में गगहा में लूट के तीन केस उस पर दर्ज हुए। गगहा में उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। 2013 में उस पर कानपुर कोतवाली और 2017 में कानपुर के चौबेपुर थाने में लूट का केस दर्ज हुआ था।
घरवालों का बोलने से इंकार, शव लेने पर असमंजस
प्रदीप तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। एक बहन भी थी। पिता दीनानाथ विदेश में रहते हैं। बड़ा भाई दीपक पिता के साथ ही है। छोटा भाई दिल्ली में जीवन यापन करता है। घर पर मां चंपा देवी और छोटी बहन के अलावा पत्नी और पांच साल का बेटा ही है। मुठभेड़ में प्रदीप के मारे जाने की खबर पहुंचने के बाद से ही उसके परिवार के सदस्य घर से बाहर नहीं निकल रहे। कुछ भी बोलने से इंकार कर दिए। शव लेंगे या नहीं, इस सवाल का भी वे जवाब नहीं दे रहे थे।