1938 में असम में पहला मंत्रिमंडल बना, उसके प्रधानमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल गए। उन्होंने गांधीजी के आह्वान पर मंत्रिमंडल सहित इस्तीफा दे दिया। जेल भी गए। दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हुआ तो फिर प्रधानमंत्री बने। आजादी के बाद असम के पहले मुख्यमंत्री बने।
छोटे से कस्बे रहा से निकलकर बोरदोलोई गुवाहाटी पहुंचे। यहां दसवीं तक की पढ़ाई की। कोलकाता में उच्च शिक्षा पाई। कानून की पढ़ाई कर फिर गुवाहाटी लौटे। वे यहां 'सोनाराम हाईस्कूल' के प्रधानाध्यापक पद पर कार्य करने लगे। वर्ष 1917 में उन्होंने वकालत शुरू की। असहयोग आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ हो लिए। इसके बाद उन्होंने आजादी और जनता की सेवा के लिए जीवन समर्पित कर दिया। 5 अगस्त, 1950 को 60 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। 1999 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।