पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके राजनीतिक सलाहकार और चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर गोवा लेकर गए हैं। गोवा में तृणमूल ने प्रशांत की सलाह और रणनीति पर बड़ा दांव लगाया है। महाराष्ट्र से सटे इसे छोटे से प्रदेश में जहां हर विधानसभा सीट पर करीब 15-20 हजार मतदाता अपना प्रतिनिधि चुन लेते हैं, विधानसभा चुनाव काफी अहम है। टीएमसी के एक बड़े नेता कहते हैं कि गोवा में तृणमूल अगर भाजपा को सत्ता में आने से रोक पाई, तो प्रशांत किशोर पर न केवल भरोसा बढ़ेगा, बल्कि उनका कद भी बढ़ जाएगा।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने गोवा में काफी उत्सुकता दिखाई है। गोवा महाराष्ट्र से भी सटा है। एनसीपी और शिवसेना का गोवा कनेक्शन भी है। इसके समानांतर उत्तर प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को समर्थन दिया। सपा ने टीएमसी का भी सम्मान किया है। तृणमूल ने उत्तराखंड में कोई गर्मजोशी नहीं दिखाई है। पंजाब में भी तृणमूल कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह या फिर कांग्रेस के बागियों पर कोई खास ध्यान नहीं दिया। मणिपुर में भी तृणमूल ने अपने विधायक के चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन करने के बाद से राजनीतिक गतिविधियों को सीमित कर लिया है। कुल मिलाकर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में विपक्ष की रणनीति भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की है।
तृणमूल के एक नेता पणजी में हैं। वह बताते हैं कि गोवा में विधानसभा चुनाव जैसे नगर निगम के चुनाव हों। हर विधानसभा सीट पर 15-20 हजार मतदाता हैं। मतदाता बाहर के लोगों को पसंद नहीं करते और पूरी तरह से क्षेत्रीय स्तर पर चुनाव होता है। इसलिए प्रचार की कमान, तौर-तरीके सब गोवा के लोग संभालते हैं। वह कहते हैं कि इस बार गोवा में कोशिश गैर भाजपा सरकार की है। हालांकि कांग्रेस पार्टी की अकर्मण्यता ने जनता के विश्वास को हिला दिया है। कांग्रेस के 17 एमएलए चुनाव जीते, 21 विधायकों का समर्थन था और फिर भी पार्टी राज्यपाल को सरकार बनाने की चिट्ठी नहीं दे सकी। कांग्रेस के 10 एमएलए भाजपा में चले गए। बाद में पांच और विधायक कांग्रेस का साथ छोड़ गए। बताते हैं कि यही इस बार भी भाजपा की ताकत है। वह क्षेत्र में इसी को प्रचारित कर रही है। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना में भी वहां तालमेल नहीं है। कांग्रेस यह चुनाव गोवा फारवर्ड ब्लाक के साथ तालमेल करके लड़ रही है।
गोवा में 40 विधानसभा सीटों के लिए 14 फरवरी को मतदान होना है। जिस पार्टी के पास 21 विधायकों का समर्थन होगा, वह सरकार बनाने की स्थिति में होगी। भाजपा की सरकार को 23 विधायकों का समर्थन हासिल था। पिछले चुनाव में कांग्रेस के 17 एमएलए जीते थे। माइकल लोबो, अलीना सल्दान्हा, प्रवीण जांटे जैसे पार्टी छोड़ने वाले विधायकों को इस बार वहां सत्ता बदलने की उम्मीद है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार दुर्गादास कामत की पार्टी गोवा फारवर्ड ब्लाक के साथ गठबंधन में पार्टी 24-25 सीटें मिल सकती हैं। जबकि तृणमूल के सर्वे के मुताबिक कांग्रेस गठबंधन के खाते में 16-17 सीटें आ सकती हैं। भाजपा गठबंधन के खाते में 10-12 सीटें आने का अनुमान है। आम आदमी पार्टी और तृणमूल के पास सीटों की संख्या बराबर रह सकती है। बताते हैं कि अगर गोवा में तृणमूल 6-7 सीटें जीतने में सफल हो गई तो राज्य की राजनीति का परिदृश्य बदल जाएगा।
छोटा सा राज्य, छोटी सी आबादी लेकिन देश का बड़ा पर्यटन का केंद्र। यहां का सबसे बड़ा मुद्दा इस बार खनन के ही रहने की उम्मीद है। राज्य में ड्रग्स और ड्रग्स का उपयोग और वहां पर्यटन की गाड़ी को पटरी पर लाने की चुनौती है। कोरोना काल में गोवा का यह उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसके चलते बेरोजगारी में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। गोवा की राजनीति में भ्रष्टाचार भी एक बड़ा मुद्दा रहता है।