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शोध में सामने आया चौंकाने वाला सच, हिमालयी इलाकों में नहीं हो रहा है पेड़ों का विकास

Mon, 22 Feb 2021 05:42 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
  • जलवायु परिवर्तन का दिख रहा है असर
  • ग्लेशियर पिघल कर पीछे खिसकते जा रहे हैं
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Himalaya region - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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आप सुनकर चौंक जाएंगे कि जलवायु परिवर्तन की वजह से इतना बड़ा असर दिखने लगा है। पेड़, पौधों से लेकर पहाड़ और बर्फ तक पर संकट के बादल छाने लगे हैं। केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान ने जलवायु परिवर्तन के पड़ने वाले ऐसे असर की एक रिपोर्ट दी है, जो चौंकाती है।

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केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु मंत्रालय ने अल्मोड़ा के जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान से जलवायु परिवर्तन के पड़ने वाले असर पर शोध करने के लिए कहा था। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान ने जो अपनी रिपोर्ट दी है, उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

रिपोर्ट कहती है कि पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन से काफी नुकसान हो रहा है। हिमालय क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में पेड़ों की (ट्री लाइन) ग्रोथ कम हो गई है। यानी कि ऊपरी हिस्से में पेड़ नहीं बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वक्त में पहाड़ी इलाकों में चरागाहों पर संकट हो सकता है। क्योंकि ज्यादार ऐसे इलाके कम होते जा रहे हैं।
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इस संस्थान ने सिक्किम इलाके के हिमालयन रीजन में किए शोध में पाया कि यहां की शाकीय पौधों की जो नैसर्गिक ऊपर की ग्रोथ थी, वह प्रभावित हुई है। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का यह असर कई दशकों तक इन इलाकों की समीक्षा करने के बाद पाया गया है। इसके अलावा हिमालयन रीजन में सेबों के उत्पादन क्षेत्रों में होने वाले परिवर्तनों पर भी चिंता जताई गई है।

ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं

जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान की केंद्रीय मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक हिमालयन रीजन में ग्लेशियर अपना स्थान छोड़कर पीछे जा रहे हैं। यानी बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं और अपनी जगह से पीछे जा रहे हैं, जहां वे वर्षों पहले हुआ करते थे। हालाकिं रिपोर्ट ने सकारात्मक संकेत भी दिए हैं, कि हिमालयन रीजन में ग्लेशियरों की संख्या भी बढ़ रही है।

पर्यावरणविद रमेश चंद्र पांडेय कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर तो पड़ ही रहा है। बदलते पर्यावरण का असर ही है कि हिमालय क्षेत्र में तमाम तरह की आपदाएं देखने को मिल रही हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के सुपर्णो कहते हैं कि अगर वक़्त रहते हम लोग नहीं चेते, तो आने वाले दिनों में और संकट हो जाएगा। हमें अपने पर्यावरण को बचाने के लिए हर प्रयास करने ही पड़ेंगे।

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