उन्होंने कहा, हम यूएनजीए के प्रस्ताव A/RES/77/318, विशेष रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता-संवाद और सहिष्णुता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने की इसकी प्रतिबद्धता, पर ध्यान देते हैं। हम इस बात पर भी जोर देते हैं कि धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता, राय या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा का अधिकार,और संघ की स्वतंत्रता का अधिकार, अंतर-संबंधित और पारस्परिक रूप से मजबूत हैं। हम उस भूमिका पर जोर देते हैं जो ये अधिकार धर्म या विश्वास के आधार पर सभी प्रकार की असहिष्णुता और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में भूमिका निभा सकते हैं।
G-20 ने अपने संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया, 'इस संबंध में हम धार्मिक प्रतीकों और पवित्र पुस्तकों सहित घरेलू कानूनी ढांचे के प्रति पूर्वाग्रह के बिना व्यक्तियों के खिलाफ धार्मिक घृणा के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 बैठक की शुरुआत में अपने परिचयात्मक संबोधन में कहा, भारत आस्था, आध्यात्मिकता और परंपराओं की विविधता का देश है। दुनिया के कई प्रमुख धर्मों ने यहां जन्म लिया और दुनिया के हर धर्म को यहां सम्मान मिला है।
उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र की जननी होने के नाते संवाद और लोकतांत्रिक सिद्धांतों में हमारा विश्वास अनादि काल से अटूट रहा है। हमारा वैश्विक आचरण 'वसुधैव कुटुम्बकम' के मूलभूत सिद्धांत में निहित है, जिसका अर्थ है 'विश्व एक परिवार है'।