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केरल में सियासी भूचाल: माकपा के बागी सुधाकरण ने राहुल गांधी संग साझा किया मंच, सीएम विजयन को बताया 'छोटा नेता'

Sat, 04 Apr 2026 06:33 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

माकपा के कद्दावर बागी नेता जी सुधाकरण ने राहुल गांधी के साथ चुनावी मंच साझा कर सबको चौंका दिया है। सुधाकरण ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका राजनीतिक कद विजयन का मोहताज नहीं है। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरे सुधाकरण ने आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके शहीद भाई तक का साथ नहीं दिया।
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एक ही मंच पर राहुल गांधी के साथ जी सुधाकरण - फोटो : @ANI
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केरल की सियासत में इन दिनों वह हो रहा है जो फिल्मों में होता है! वामपंथ के सबसे मजबूत किलों में से एक अलप्पुझा में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी गूंज तिरुवनंतपुरम के सत्ता के गलियारों तक बहुत जोर से सुनाई दे रही है। दरअसल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) के कद्दावर नेता जी सुधाकरण ने बगावत की लाल झंडी उठा ली है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 
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हालांकि,  इसमें अब तक की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दशकों तक कम्युनिस्ट विचारधारा को जीने वाले सुधाकरण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। 

विजयन पर बरसे सुधाकरण
जी सुधाकरण ने कहा कि मैंने कम्युनिस्ट पार्टी में 63 साल गुजारे हैं। जब मैं 15 साल का था, तब पार्टी से जुड़ा था। मेरा अपना एक लंबा राजनीतिक इतिहास है। उन्होंने कहा कि 1967 के दौर में जब वह खुद जमीन पर काम कर रहे थे, तब विजयन को त्रावणकोर और दक्षिण केरल में कोई जानता तक नहीं था। वह सिर्फ मालाबार के थालास्सेरी तक ही सीमित थे।
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राहुल गांधी ने किया स्वागत
राहुल गांधी ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने मंच से सुधाकरण का गर्मजोशी से स्वागत किया। राहुल ने कहा कि आज वामपंथ अपनी विचारधारा खो चुका है और उसकी बुनियाद कमजोर हो गई है। यही वजह है कि सुधाकरण जैसे कद्दावर और सच्चे नेताओं को कांग्रेस और यूडीएफ के साथ आना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में माकपा ने सुधाकरण को किनारे कर दिया था, जिसके बाद से वह शांत बैठे थे। लेकिन इस बार चुनाव से ठीक पहले उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन यूडीएफ ने तुरंत उन्हें अपना समर्थन दे दिया, जिससे अलप्पुझा की लड़ाई अब बेहद रोमांचक हो गई है।
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भावुक होकर किया 'शहीद' भाई को याद
सुधाकरण सिर्फ राजनीतिक हमले तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने एक बेहद भावुक मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन के नेतृत्व वाली माकपा ने उनके शहीद भाई की कानूनी लड़ाई में भी परिवार का साथ नहीं दिया। उन्हें अपने भाई के लिए न्याय की लड़ाई अकेले अपने पैसों के दम पर लड़नी पड़ी।

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