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'चुनाव आयोग की स्वतंत्रता जरूरी': सुप्रीम कोर्ट जज ने कहा- सांविधानिक संस्थाओं पर दबाव घातक, निष्पक्षता अहम

Sat, 04 Apr 2026 06:29 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि चुनाव आयोग और CAG जैसी सांविधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक प्रभाव से इन संस्थाओं की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने वित्त आयोग और अन्य नियामक संस्थाओं की भूमिका भी अहम बताई।
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सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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लोकतंत्र की मजबूती और निष्पक्ष शासन के लिए सांविधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को बेहद जरूरी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी वी नागरत्ना ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहना चाहिए। इससे लोकतंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहती है।
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पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संविधान ने जानबूझकर ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया है, जो शासन के अहम क्षेत्रों की निगरानी करें। उन्होंने कहा कि अगर इन संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ेगा, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है।

क्या चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए जरूरी है?
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि चुनाव सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की नींव है। भारतीय चुनाव आयोग की स्वतंत्रता जरूरी है, क्योंकि यही संस्था चुनावों को निष्पक्ष तरीके से कराती है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई, तो पूरे लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
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क्या सीएजी की भूमिका सरकार की जवाबदेही तय करती है?
उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च का ऑडिट जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनता का पैसा सही तरीके से खर्च हो रहा है। अगर यह निगरानी कमजोर हुई, तो वित्तीय पारदर्शिता खत्म हो सकती है।

क्या वित्त आयोग भी संतुलन बनाए रखने में अहम है?
जस्टिस नागरत्ना ने वित्त आयोग का जिक्र करते हुए कहा कि यह संस्था राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इससे राजनीतिक प्रभाव के बजाय निष्पक्ष तरीके से संसाधनों का वितरण होता है।

क्या अन्य नियामक संस्थाओं की भी भूमिका महत्वपूर्ण है?
उन्होंने कहा कि आज के समय में कई नियामक संस्थाएं जैसे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ये संस्थाएं जटिल आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखती हैं।
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क्या संस्थाओं की स्वतंत्रता खत्म होने से लोकतंत्र पर असर पड़ेगा?
जस्टिस नागरत्ना ने चेतावनी दी कि अगर सांविधानिक संस्थाएं एक-दूसरे पर निगरानी रखना बंद कर देंगी, तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि जब संस्थाएं कमजोर होती हैं, तो संविधान की संरचना भी टूटने लगती है। ऐसे में इन संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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