इस बीच मुझमें पेंटिंग करने का शौक जागा। मुझे मेरी मां ने पेंटिंग बनाने के लिए लगातार प्रेरित किया। मुझे भी लगता था कि पेंटिंग में मैं अपना करियर बना सकती हूं और पापा का सिर गर्व से ऊंचा कर सकती हूं। पापा को जब मैंने बताया कि मैं पेंटिंग को ही करियर बनाना चाहती हूं, तो वे बहुत खुश हुए। उन्होंने मुझे सख्ती से किसी चीज के लिए नहीं रोका। मेरी जरूरतों को पूरा किया और हर फैसले में मेरे साथ खड़े रहे। मेरी मां और पापा के बीच जब अलगाव हो गया था, तब भी दोनों ने मुझे यह महसूस ही नहीं होने दिया कि मेरे लिए उन दोनों के मन में प्यार या संरक्षण का भाव कम हुआ है। उनके बीच की दूरियों ने भी हमारे प्रति उनके उत्तरदायित्व को कभी कम नहीं होने दिया।
उन्होंने कभी धर्म को भी खुद पर हावी होने नहीं दिया। जब भाई ने एक हिंदू लड़की से शादी की, तब भी उन्हें कोई गुरेज नहीं था। और जब मैंने पापा को बताया कि मुझे टेनिस खिलाड़ी रोहित राजपाल से शादी करनी है, तब भी उन्होंने मुझे रोका नहीं। बावजूद इसके कि रोहित हिंदु थे, पापा ने कोई एतराज नहीं जताया। उन्होंने मेरी पसंद को प्राथमिकता दी और बहुत धूमधाम से मेरी शादी की। उनके लिए किसी भी धर्म से बढ़कर अपना परिवार और उनकी खुशी मायने रखती थी। शुरू से ही पापा मेरे आदर्श रहे हैं। वे सिर्फ फिल्मी पर्दे पर ही बेहद स्टाइलिश नजर नहीं आते थे, बल्कि निजी जीवन में भी बहुत ठाठ से रहने वाले शख्स थे। उनका जीवन जीने का अपना अंदाज था। उनकी मामूली चीजों में भी स्टाइल होता था।
वे बहुत जिंदादिल इंसान थे। जब पापा मुंबई आए थे, तब उनके पिता की मौत हो चुकी थी। पापा ने पूरे परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने अपने सभी भाइयों को मुंबई बुलाया और स्थापित किया। उनके सारे भाई उनकी बहुत इज्जत करते थे। परिवार के अलावा भी पापा ने बहुत लोगों की मदद की। फिल्म इंडस्ट्री को कई नए चेहरे दिए। लोगों को कई मौके दिए। वे बहुत दयालु इंसान थे। हालांकि, मुझे इस बात का अफसोस जरूर होता है कि पापा ने फिल्म इंडस्ट्री को जो दिया उसकी चर्चा कभी नहीं होती है। हिंदी फिल्मों में पहली बार कार रेसिंग, विदेशों में नई लोकेशन्स पर शूटिंग के अलावा भी और कई तरह के प्रयोग करने वाले फिरोज खान को महज स्टाइलिश हीरो के रूप में ही याद किया जाता है। आज पापा तो नहीं हैं, लेकिन अपनी फिल्मों के जरिए वे अपने प्रशंसकों और मुझे हमेशा याद रहते हैं। मुझे गर्व है कि मैं फिरोज खान की बेटी हूं।
इकबाल रिजवी से बातचीत पर आधारित