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भारत का रुख: चीन के साथ विवाद से लेकर एस-400 सौदे पर अमेरिकी आपत्ति तक, विदेश मंत्रालय के ये रहे जवाब

Thu, 07 Oct 2021 08:59 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मजबूत रिश्तों के बावजूद अमेरिका लंबे समय से भारत-रूस एस-400 डील को लेकर आपत्ति जताता रहा है। अमेरिकी उप-विदेश मंत्री के भारत दौरे के दौरान फिर ये मुद्दा उठाया गया। 
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अरिंदम बागची - फोटो : ANI
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विस्तार
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विदेश मंत्रालय ने आज जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमलों, भारत-अफगानिस्तान के बीच उड़ान बहाली और एस-400 सौदे समेत कई मुद्दों पर सिलसिलेवार जवाब दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने डेनमार्क के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा और किम डेवी के प्रत्यर्पण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की।  

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जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमला 
जम्मू और कश्मीर में हाल के आतंकी हमलों पर अरिंदम बागची ने कहा कि हम ऐसे हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। हम सीमा पार आतंकवाद को लेकर चिंतित हैं और तमाम मंचों पर इस मुद्दे की चर्चा कर रहे हैं।

भारत-अफगानिस्तान के बीच उड़ान बहाली
भारत और अफगानिस्तान के बीच उड़ानों की बहाली पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मेरे पास हवाई यात्रा फिर से शुरू करने को लेकर कोई जानकारी नहीं है। यह एक जटिल और संवेदनशील मामला है।  
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भारत- चीन सीमा विवाद 
भारत- चीन सीमा विवाद पर प्रवक्ता ने कहा कि उम्मीद है कि चीन हमारे साथ मिलकर काम करेगा। बाकी इलाकों में भी सैनिकों को हटाने का काम आगे बढ़ना चाहिए। कुछ इलाकों में सैनिक हट गए हैं, कुछ इलाकों में बाकी है। हम चाहते हैं कि चीन द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करे।

एस-400 सौदे पर अमेरिका की आपत्ति
अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमन की यात्रा को अरिंदम बागची ने उपयोगी और उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान रूस के साथ एस-400 सौदे का मुद्दा भी उठाया गया। हमने अपना दृष्टिकोण सामने रखा। अभी इस पर चर्चा चल रही है।

डेनमार्क के प्रधानमंत्री की यात्रा
डेनमार्क के प्रधानमंत्री की यात्रा पर उन्होंने कहा कि एजेंडा में नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियां, जल और अपशिष्ट प्रबंधन, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण, स्मार्ट शहर जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। यह यात्रा हरित रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने और यह देखने का अवसर देगी कि हम आगे क्या कर सकते हैं। डेनमार्क की 200 कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं और 60 भारतीय कंपनियों ने डेनमार्क में निवेश किया है। हम किम डेवी के प्रत्यर्पण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमने इस मुद्दे को पहले भी उठाया है और इस मुद्दे पर डेनमार्क के साथ बातचीत कर रहे हैं। 
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