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Manipur: पंजाब से चावल लेकर मणिपुर पहुंची मालगाड़ी, सीएम बीरेन बोले- लोगों को नहीं होगी आवश्यक वस्तुओं की कमी

Sat, 13 Jul 2024 06:12 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल

सार

सीएम एन बीरेन सिंह ने शनिवार को नोनी जिले के खोंगसांग रेलवे स्टेशन का हवाई दौरा करते हुए खाद्यान्न की खेप का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पिछले 14 महीने से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सरकार लोगों को अनाज, आवश्यक वस्तुएं और ईंधन मुहैया करा रही है।
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मणिपुर के सीएम एन. बीरेन सिंह - फोटो : ANI
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विस्तार
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मणिपुर में पिछले एक साल से दो समुदायों के बीच जारी हिंसा के बीच सरकार का फोकस लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने पर है। शनिवार को पंजाब से 950 मीट्रिक टन चावल लेकर 15 वैगन वाली मालगाड़ी मणिपुर के खोंगसांग रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इसे लेकर सीएम एन बीरेन सिंह ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि लोगों को आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है। 

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सीएम एन बीरेन सिंह ने शनिवार को नोनी जिले के खोंगसांग रेलवे स्टेशन का हवाई दौरा करते हुए खाद्यान्न की खेप का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पिछले 14 महीने से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सरकार लोगों को अनाज, आवश्यक वस्तुएं और ईंधन मुहैया करा रही है। ताकि लोगों को दिक्कत का सामना न करना पडे़। खाद्यान्न पहुंचाने का श्रेय उन्होंने सुरक्षा एजेंसी, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), रेलवे और भारत सरकार के नेताओं को दिया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेलवे और एफसीआई का आभार जताते हुए सीएम सिंह ने कहा कि यह आवश्यक वस्तुओं की तीसरी खेप मणिपुर आई है। इससे पहले दो सुरक्षित डिलीवरी की गईं। जिनका मणिपुरा की जनता को लाभ मिला। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सुरक्षा बल, सीआरपीएफ, बीएसएफ और लोगों के सहयोग से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। 
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सीएम ने एक्स पर पोस्ट किया कि पंजाब से चावल की पहली रैक आने पर खुशी मिली है। यह मणिपुर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।

मणिपुर में एक साल से जारी है हिंसा
मणिपुर में पिछले एक साल से ही हिंसा जारी है। दरअसल, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में पिछले साल तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।  

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