सरकार ने टोल नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस राहत भरे बदलाव के जरिए अब जीएनएसएस से लैस निजी वाहनों को 20 किलोमीटर तक टोल टैक्स नहीं देना होगा। दरअसल, नए नियमों में कहा गया है कि वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (जीएनएसएस) से लैस निजी वाहनों के मालिकों से राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर रोजाना 20 किलोमीटर तक के सफर के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पायलट आधार पर लागू करने का फैसला किया था
इससे पहले मंत्रालय ने जुलाई में कहा था कि उसने फास्टैग के साथ एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर उपग्रह-आधारित टोल संग्रह प्रणाली को पायलट आधार पर लागू करने का फैसला किया है। जीएनएसएस-आधारित उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह प्रणाली का एक पायलट अध्ययन कर्नाटक में एनएच-275 के बेंगलुरु-मैसूर खंड और हरियाणा में एनएच-709 के पानीपत-हिसार खंड पर किया गया है।
क्या है ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम?
GNSS-आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम के तहत हाईवे पर तय की गई दूरी के आधार पर टोल लिया जाता है। मौजूदा तरीके के तहत भले ही यूजर टोल रोड के एक हिस्से की यात्रा करता है, उसे एक निश्चित राशि का भुगतान करना पड़ता है। सैटेलाइट-आधारित सिस्टम वाहन की गतिविधि को ट्रैक करती है और वाहनों में लगे ऑन बोर्ड यूनिट की मदद से शुल्क की गणना करती है।
जीएनएसएस और जीपीएस में अंतर?
जीएनएसएस सैटेलाइट प्रणाली वह समूह है तो जो स्थिति और समय संबंधी संपूर्ण डेटा प्रदान करता है। वहीं, वैश्विक स्थान-निर्धारण प्रणाली (जीपीएस) जीएनएसएस के तहत आने वाले एक एक विशिष्ट प्रणाली है जो स्थान निर्धारित करने के लिए उपग्रहों का उपयोग करता है। आसान भाषा में समझें तो जीएनएसएस उपग्रहों का एक समूह है जो पृथ्वी पर मौजूद रिसीवर्स को डेटा प्रेषित करता है, वहीं जीपीएस उपग्रहों और रिसीवर्स का एक नेटवर्क हो किसी स्थान विशेष की जानकारी देता है।