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Agniveer Death: चौथे अग्निवीर की श्रीनगर में संदेहास्पद परिस्थितियों में गोली लगने से मौत, सेना ने बैठाई जांच

Sat, 11 May 2024 05:13 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेना के अधिकारियों का कहना है कि पैराट्रूपर अग्निवीर जितेंद्र सिंह तंवर की मौत की सही वजह जानने के लिए जांच बैठा दी गई है। जितेंद्र की गुरुवार को श्रीनगर में गोली लगने से मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार राजस्थान के अलवर जिले में उनके पैतृक गांव में किया गया है।
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Agniveer - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारतीय सेना ने पैराट्रूपर अग्निवीर जितेंद्र सिंह तंवर की मौत की सही वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी है। अग्निवीर जितेंद्र सिंह तंवर की गुरुवार को गोली लगने से मौत हो गई थी। पैराट्रूपर तंवर 3 पैरा स्पेशल फोर्स बटालियन में तैनात थे। 23 वर्षीय जितेंद्र साल 2022 में बतौर अग्निवीर सेना में भर्ती हुए थे। जितेंद्र के परिजनों का कहना है कि आतंकी सर्च ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हुई है। अग्निपथ स्कीम लॉन्च होने के बाद से यह चौथे अग्निवीर की मौत है।  

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सेना ने बैठाई जांच 
सेना के अधिकारियों का कहना है कि पैराट्रूपर अग्निवीर जितेंद्र सिंह तंवर की मौत की सही वजह जानने के लिए जांच बैठा दी गई है। जितेंद्र की गुरुवार को श्रीनगर में गोली लगने से मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार राजस्थान के अलवर जिले में उनके पैतृक गांव में किया गया है। सेना के सूत्रों का कहना है कि घटना श्रीनगर में हुई, जहां जितेंद्र तंवर की तैनाती थी। गोली लगने की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है, जिसके चलते अभी सेना के अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। 

ये है परिजनों का दावा
सेना के सूत्रों का कहना है कि शोक संतृप्त परिवार के साथ उनकी पूरी संवेदना है और मामले की गहन जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उनका कहना है कि स्थानीय मीडिया की तरफ से ही यह बताया जा रहा है कि सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की तरफ से फायरिंग होने पर अग्निवीर जितेंद्र की मौत हुई है। यह सही है कि उनकी मौत गोली लगने से हुई है, लेकिन किसी ऑपरेशन में नहीं हुई है। मामला संदेहास्पद है, जिसकी वजह से मामले की गहन जांच की जा रही है। रिपोर्टेस के मुताबिक जितेंद्र के घरवालों का कहना है कि उन्हें गुरुवार दोपहर जयपुर से सूचना मिली कि जितेंद्र की सिर में गोली लगने से मौत हो गई है। जिसके बाद उन्होंने आर्मी बटालियन श्रीनगर से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में आतंकी मुठभेड़ में जितेंद्र की मौत हुई।
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अग्निवीर जितेंद्र राजस्थान के अलवर जिले के गढ़ीसवाईराम रैणी उपखंड क्षेत्र की छिलोड़ी ग्राम पंचायत के गांव नवलपुरा के रहने वाले थे। जितेंद्र 29 दिसंबर 2022 को बतौर अग्निवीर सेना में भर्ती हुए थे, उसकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाके में हुई थी। सेना के अधिकारी शुक्रवार शाम करीब 5 बजे मृतक जवान का पार्थिव शरीर लेकर उनके गांव पहुंचे और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। 

पूर्व सेना अध्यक्ष भी अग्निपथ स्कीम से हो गए थे हैरान
सेना ने 14 जून 2022 को अग्निपथ स्कीम को लॉन्च किया था। इस स्कीम के तहत तीनों सेनाओं में पहले साल में 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती होनी थी। इनकी भर्ती केवल चार साल के लिए होगी। लॉन्च होने के बाद से ही अग्निपथ स्कीम को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। विपक्ष ने भी इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने अपनी किताब में खुलासा किया था कि यह स्कीम सरकार की तरफ से लाई गई थी और वे भी इस योजना को देख कर हैरान हो गए थे। 

अभी तक चौथे अग्निवीर की मौत
वहीं भारतीय सेना में अग्निपथ स्कीन लॉन्च होने के बाद से अभी तक यह चौथे अग्निवीर की मौत है। इससे पहले 11 अक्तूबर, 2023 को पंजाब के एक अग्निवीर अमृतपाल सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में जम्मू में मौत हो गई थी। सेना ने कई दिन स्पष्टीकरण दिया था कि इस मामले में सैन्य सम्मान नहीं दिया गया था, क्योंकि मौत की वजह आत्महत्या थी। वहीं, 22 अक्तूबर, 2023 को सियाचिन में ड्यूटी के दौरान अग्निवीर अक्षय लक्ष्मण गावते की जान चली गई थी। सेना ने इस मामले में माना था कि अक्षय लक्ष्मण गावते की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है, इसलिए वे सेना की तरफ से मिलने वाली आर्थिक मदद के पात्र हैं। वहीं इसी साल 19 जनवरी, 2024 को जम्मू के राजौरी जिले के नौशेरा में एलओसी पर गश्त के दौरान बारूदी सुरंग यानी लैंड माइन पर पैर पड़ने से लुधियाना जिले के रहने वाले अग्निवीर अजय सिंह की मौत हो गई थी। सेना का स्पष्ट कहना है कि अगर कोई अग्निवीर सुसाइड कर लेता है, तो गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा। 

ये है तनख्वाह और शहीद होने पर मिलती है यह रकम
अग्निवीरों को पहले साल 30 हजार रुपये, दूसरे साल 33 हजार, तीसरे साल 36 हजार 500 और आखिरी साल में 40 हजार रुपये प्रति महीना सेलरी मिलती है। वहीं 30 फीसदी हिस्सा कॉर्पस फंड में जमा करना पड़ता है और सरकार भी इतनी ही राशि का योगदान इस फंड में देती है। साथ ही, तीनों सेनाओं में तैनात अग्निवीरों को स्थायी सैनिकों की तरह अवॉर्ड, मेडल और भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, सरकार 44 लाख रुपये का बीमा भी कराएगी। 

वहीं अगर कोई अग्निवीर ड्यूटी के दौरान शहीद होता है, तो उसे 48 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर, 44 लाख रुपये अनुग्रह राशि, चार सालों की सेवा निधि और कॉर्पस फंड मिलता है। मृतक अक्षय लक्ष्मण गावते के परिवारजनों को कुल मिला कर एक करोड़ 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इनमें 48 लाख रुपये गैर-अंशदायी बीमा (इंश्योरेंस कवर), 44 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एकमुश्त एक्स-ग्रेशिया), आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन से 30,000 रुपये, आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड से 8 लाख रुपये, सेवा निधि में अग्निवीर द्वारा दिए गए 30 फीसदी योगदान, जिसमें सरकार का भी बराबर योगदान होता है और पूरी राशि पर ब्याज दिया गया है। इसके अलावा परिजनों को मृत्यु की तारीख से चार साल पूरे होने तक शेष कार्यकाल के लिए  वेतन भी दिया जाता है। 

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