केंद्रीय वित्त पोषण में सुधार के लिए गैर भाजपा शासित चार राज्य एकजुट हुए। केरल में हुए सम्मेलन में तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब के मंत्रियों और अधिकारियों ने केंद्र सरकार से प्रदर्शन के आधार बजट में हिस्सेदारी देने की मांग की। साथ ही केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 50 फीसदी करने का मुद्दा उठाया।
सम्मेलन में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू, तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेनारासु, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और पंजाब के वित्त मंत्री सरदार हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा की राजकोषीय नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसमें केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने भाग लिया।
सम्मेलन में कर्नाटक के वित्त मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि केंद्र में योगदान देने वाले राज्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से कुछ नहीं मिलता। हम समान पारस्परिकता की मांग नहीं करते। अगर हम अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो हम केंद्र को बड़ा योगदान दे सकते हैं। चार राज्यों में प्रति व्यक्ति आय और उच्च विकास दर है। केरल मानव विकास सूचकांक में पूरे देश में शीर्ष पर है। क्योंकि हमने सभी क्षेत्रों में निवेश किया है। अगर केंद्र हमें ठीकठाक बजट नहीं देता है तो हम भी वैसा सामाजिक बुनियादी ढांचा, आर्थिक बुनियादी ढांचा और मानव विकास प्रदान नहीं कर सकते जिसकी पूरे देश को जरूरत है।
पंजाब के मंत्री चीमा ने कहा कि 16वां वित्त आयोग विभाज्य पूल के आवंटन के लिए एक फॉर्मूला तैयार करेगा जो न केवल राज्यों को विकास के मामलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करेगा बल्कि उन राज्यों को पर्याप्त संसाधन भी आवंटित करेगा। जिन्हें अपने प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए समर्थन की जरूरत है।
तेलंगाना के मंत्री मल्लू ने कहा कि केंद्र अक्सर अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पार कर जाता है। तब ऐसी स्थिति बनती है कि राज्यों की उधार लेने की क्षमता सीमित हो जाती है। इसलिए अनुच्छेद 293 की केरल व्याख्या का पालन किया जाए और राज्य की वित्तीय स्वायत्तता के पक्ष में केंद्र की शक्तियों को फिर से परिभाषित किया जाए। हमारे संविधान के निर्माताओं ने कभी भी केंद्र और राज्यों के बीच केंद्रीकृत वित्तीय नियंत्रण का इरादा नहीं किया था। वित्त आयोग की स्थापना निष्पक्ष और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
उन्होंने सुझाव दिया कि सबसे गरीब राज्यों को अधिक धनराशि आवंटित करने के प्रभाव का अध्ययन करें। केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जानी चाहिए। साथ ही केंद्र द्वारा उपकर और अधिभार के बढ़ते उपयोग का विरोध किया जाना चाहिए। केंद्र प्रायोजित योजनाओं को कम किया जाना चाहिए और राज्यों को अपने पर खर्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
तमिलनाडु के मंत्री थेनारासु ने कहा कि भारतीय राजनीति में संघ और राज्यों के बीच शक्तियों और जिम्मेदारियों के वितरण में असंतुलन है। जहां राज्यों पर समाज के विकास और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक कल्याण सहित सार्वजनिक सेवाओं की जिम्मेदारी है, लेकिन केंद्र के पास राजस्व सृजन की अधिकांश शक्तियां हैं। इसलिए जरूरी है कि राज्य सामूहिक रूप से केंद्रीय कर हस्तांतरण में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की वकालत करें। तमिलनाडु को वित्त आयोगों ने लगातार दंडित किया और 15वें वित्त आयोग में हस्तांतरण में उसकी हिस्सेदारी घटकर मात्र 4.079 प्रतिशत रह गई है। इससे तमिलनाडु राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।