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ईमोटराड: चार दोस्तों ने आपदा के दौर में लिखी विजय की एक कहानी; साथ मिलकर बनाई 400 करोड़ की कंपनी

सार

चार दोस्तों राजीव गंगोपाध्याय, कुणाल गुप्ता, सुमेध बट्टेवार और आदित्य ओझा द्वारा स्थापित ईमोटराड का सफर कोरोना महामारी के वैश्विक संकट के बीच शुरू हुआ। ईमोटराड के चारों संस्थापकों ने व्यक्तिगत और पर्यावरण से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी आसन्न संकट को टालने के लिए साझा मिशन से प्रेरित होकर इसकी स्थापना की।
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चार दोस्तों ने मिलकर बनाई 400 करोड़ की कंपनी। - फोटो : EM
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विस्तार
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जब देश कोविड-19 महामारी से जूझ रहा था, एक कमरे में प्रतिबद्धता के साथ ईमोटराड का जन्म एक आशा की किरण की तरह हुआ, जिसने आपदा के दौर में एक विजय की कहानी लिख दी। आज इमोटराड एक ऐसे इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) स्टार्टअप के रूप में नई ऊंचाइयों को छू रही है, जिसने पंथेरा ग्रोथ पार्टनर्स से 164 करोड़ रुपये की बड़ी फंडिंग हासिल की है।

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चार दोस्तों राजीव गंगोपाध्याय, कुणाल गुप्ता, सुमेध बट्टेवार और आदित्य ओझा द्वारा स्थापित ईमोटराड का सफर कोरोना महामारी के वैश्विक संकट के बीच शुरू हुआ। ईमोटराड के चारों संस्थापकों ने व्यक्तिगत और पर्यावरण से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी आसन्न संकट को टालने के लिए साझा मिशन से प्रेरित होकर इसकी स्थापना की। टिकाऊ परिवहन सुविधा मुहैया करवाकर व्यक्तिगत जीवनशैली में बदलाव पर उनका फोकस रहा।

शुरुआती दिन संघर्ष के थे। कोरोना महामारी के बीच फंड्स का संकट था, लेकिन संस्थापकों का धैर्य और उत्साह ईमोटराड को आगे बढ़ाता रहा। बिना थके काम करते हुए उन्होंने चुनौतियों को अवसरों में बदला। इनोवेशन और संघर्ष से निकलकर मजबूत वापसी की एक नई कहानी गढ़ दी। कभी एक कमरे में अनिश्चितता से जूझने वाली ईमोटार्ड का इलेक्ट्रिक साइकिल इंडस्ट्री में क्रांति लाने का सपना जड़ें जमा चुका है।
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ईमोटराड के सह-संस्थापक राजीव गंगोपाध्याय ने बताया, ‘ईमोटराड का जन्म इस भरोसे के साथ हुआ कि व्यक्तिगत और पर्यावरण की सेहत एक दूसरे से जुड़ी हुई है। कोरोना संकट के दौरान हम न केवल इलेक्ट्रिक साइकिल बना रहे थे, बल्कि हम ‘एक समय में एक पैडल’ के ध्येय के साथ सतत् भविष्य का निर्माण भी कर रहे थे’ फंड्स के लिए संघर्ष कई स्टार्टअप्स के लिए कठिन बाधा बन जाती है, लेकिन इमोटराड की अदम्य भावना के लिए यह एक उत्प्रेरक का काम कर रही थी। इस यात्रा पर नजर डालते हुए कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक कुणाल गुप्ता ने कहा, ‘ हर रिजेक्शन ने हमारे दृढ़ संकल्प को मजबूत किया। हम केवल एक कंपनी नहीं बना रहे थे, हम कुछ अलग करने के मिशन पर थे। यही हमें आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करता रहा।’

ईमोटराड के सीएमओ और सह-संस्थापक आदित्य ओझा ने कहा, ‘हमारा सपना हर उस बाधा से बड़ा था जिसका हमने सामना किया। हमारा विश्वास है कि लोगों की जीवनशैली की पसंद बदलकर हम ज्यादा स्वस्थ और टिकाऊ दुनिया को मदद कर सकते हैं। हमारे पास ड्राइवट्रेन टेक्नोलॉजी है, जिससे इस मूवमेंट की तस्वीर हमेशा के लिए बदल सकती है।’

कंपनी के अन्य सह-संस्थापक और सीएफओ सुमेध बट्टेवार ने कहा, ‘ हमारा सफर साझा सपने की ताकत का एक प्रमाण है। हमने आने वाली चुनौतियों को यह मानकर स्वीकार किया कि हर चुनौती हमें अपने लक्ष्य के करीब ले जा रही है। यह फंडिंग केवल एक निवेश नहीं है, बल्कि सतत् भविष्य के प्रति हमारे अथक प्रयास को एक स्वीकृति है।’

ईमोटराड ने पंथेरा ग्रोथ पार्टनर्स और अन्य प्रतिभागियों से 164 करोड़ रुपये की फंडिंग हासिल कर एक नया अध्याय लिखा है। इस स्टार्टअप की कहानी इसके संस्थापकों के धैर्य, उत्साह और कठिन दौर से वापसी करने को दर्शाती है। ईमोटार्ड को मिली फंडिंग विपरीत परिस्थितियों पर विजय की प्रतीक और चीन को टक्कर देते हुए भारत को इलेक्ट्रिक साइकिल्स के निर्माण में अग्रणी स्थान पर रखती है।

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