आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गाजियाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू-मुस्लिमों के पूर्वजों को एक बताया था। उन्होंने कहा था कि हिंदू-मुस्लिमों की पूजा-पद्धति आज भले ही अलग हो गई है, लेकिन दोनों के पूर्वज एक थे, दोनों का डीएनए एक है। मोहन भागवत के इस बयान पर मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद लगातार गौरक्षा के लिए काम करते रहे हैं। इसके लिए विहिप में एक गौरक्षा विभाग भी बनाया गया है। लेकिन मोहन भागवत ने अपने बयान में ऐसे गौरक्षकों को 'अपराधी और गुंडे' करार दिया है। ऐसे में मोहन भागवत को बताना चाहिए कि क्या अब तक आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के कैंपों में आतंकी तैयार किए जा रहे थे, जिन्होंने आज तक गौरक्षा का काम किया?
उन्होंने गौरक्षकों को अपराधी समझने की बात का विरोध किया और कहा कि आरएसएस के सभी नेता गौरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग करते रहे हैं। आज जब केंद्र में आरएसएस समर्थित भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है, आज गौरक्षा का केंद्रीय कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा है?
तोगड़िया ने हिंदू-मुस्लिमों के पूर्वजों को एक बताने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह, महाराजा रणजीत सिंह, महाराणा प्रताप, शिवाजी और धर्म न बदलने के कारण अपनी जान गंवाने वाली हरियाणा की बेटी निकिता तोमर जैसे लोग उनके पूर्वज हैं, लेकिन वे लोग उनके पुरखे नहीं हैं जो हिंदुओं के धर्मांतरण के अपराधी रहे हैं, जिन्होंने अपनी तलवार के दम पर निरपराध लोगों का जबरन धर्मांतरण कराया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की बात केवल हिंदू समुदाय मानता है, अगर मुस्लिम समुदाय भी इसी तरह सबको एक समान मानता तो कश्मीर में लाखों हिंदुओं का कत्ल और पलायन नहीं होता। उन्होंने कहा कि भाईचारे की जिम्मेदारी सब धर्मों पर एक समान लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हम सभी लोगों को अपना पुरखा मानने लगेंगे, तो क्या अब हिंदुओं को औरंगजेब, मुहम्मद गौरी और गजनी का भी श्राद्ध-तर्पण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोगों का तर्पण होगा तो उनका गोत्र क्या बताना होगा, यह भी बताना चाहिए।
तोगड़िया ने पूछा कि अगर शिवाजी-महाराणा प्रताप मुगलों से लड़ रहे थे तो क्या वे गलत कर रहे थे? क्या उन्हें इन लोगों से लड़ना नहीं चाहिए था, बल्कि उनसे अपनी बहन-बेटियों की शादी कर देनी चाहिए थी क्योंकि (मोहन भागवत के बयान के अनुसार) वे भी एक ही वंशज के पत्र थे। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान केवल हिंदू समाज को दिग्भ्रमित करने की कोशिश है।