फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Justice AS Oka: कॉलेजियम को असहमति पर गौर करने की जरूरत; जस्टिस नागरत्ना की असहमति पर शीर्ष अदालत के पूर्व जज

Thu, 28 Aug 2025 01:43 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एएस ओका ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम प्रक्रिया में असहमति को गंभीरता से लेना चाहिए और पारदर्शिता जरूरी है। लेकिन सारी जानकारी सार्वजनिक करने से उन वकीलों की निजी छवि प्रभावित हो सकती है, जिनके नाम चुने नहीं गए। इसलिए गोपनीयता और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। 
विज्ञापन
एएस ओका, पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों पर जस्टिस बीवी नागरत्ना की कड़ी असहमति के बावजूद, दो हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए जाने के बारे में अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एएस ओका ने टिप्पणी की है। जस्टिस (रि.) ओका ने कहा, हाईकोर्ट से लेकर सरकार तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और कॉलेजियम में किसी भी असहमति पर गौर करने की जरूरत है।

विज्ञापन


जस्टिस (रि.) ओका, उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (रि.) एस मुरलीधर की ओर से संपादित पुस्तक (इन)कंप्लीट जस्टिस? द सुप्रीम कोर्ट एट 75 के विमोचन के अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।

ये भी पढ़ें: Seat Ka Samikaran: नवादा विधानसभा सीट पर रहा है दो यादव परिवारों का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
विज्ञापन


जयसिंह ने जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस ओका तथा राजनीतिशास्त्री गोपाल गुरु वाले पैनल से कॉलेजियम के कामकाज के बारे में पूछा। जयसिंह ने जस्टिस ओका से जानना चाहा कि जब कॉलेजियम की एकमात्र महिला न्यायाधीश ने नियुक्ति से असहमति जताई हो तो ऐसे में भारत के भावी चीफ जस्टिस के चयन का क्या मानदंड है और कॉलेजियम गोपनीयता से काम क्यों करता है?

जस्टिस ओका ने कहा, यह सवाल बहुत चिंताजनक है, लेकिन मैं कहता रहा हूं कि हमें पारदर्शिता को परिभाषित करना होगा। आप सही कह रही हैं कि जब एक न्यायाधीश ने असहमति जताई है, तो हमें पता होना चाहिए कि वह असहमति क्या है - इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आपको यह आलोचना करने का अधिकार हो सकता है कि वह असहमति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

ये भी पढ़ें: India-Finland Ties: पीएम मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति से की बातचीत, व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति
विज्ञापन


हालांकि जस्टिस ओका ने यह भी कहा कि अगर कॉलेजियम के विचार-विमर्श और बैठक की चीजें सार्वजनिक डोमेन में अपलोड किए जाते हैं, तो इससे उन वकीलों की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है जिन्होंने कॉलेजियम द्वारा अपने नाम पर विचार किए जाने के लिए सहमति दी है। उन्होंने कहा, अगर कॉलेजियम 10 या 15 वकीलों पर विचार करता है, जिनमें से 10 मामलों पर सहमति बनती है और पांच की सिफारिश नहीं की जाती, तो क्या हमें उन लोगों की निजता की चिंता नहीं है जिन्होंने स्वेच्छा से सहमति दी है? उन्हें वापस जाकर प्रैक्टिस करनी होगी।

कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रहे ओका ने कहा, एक बार जब ये मामले सार्वजनिक हो जाते हैं, तो इन व्यक्तियों की पिछले तीन वर्षों की कमाई भी सार्वजनिक हो जाता है। उन्होंने कहा, इसलिए हमें इसे गोपनीयता के साथ संतुलित करना होगा।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें