भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष को संबोधित एक ऑडियो संदेश में शेखर ने दावा किया कि वह दो अन्य लोगों के साथ तीन-चार महीने पहले नागपुर में आरएसएस मुख्यालय गए थे। हेडगेवार संग्रहालय के दौरे के दौरान प्रवेश द्वार पर किसी ने उनसे आगंतुक रजिस्टर पर अपना नाम और पता लिखने को कहा।
उन्होंने आरोप लगाया, मैंने (आगंतुक रजिस्टर में) अपना नाम लिखा और मैं अंदर कदम रखने ही वाला था कि वहां खड़े व्यक्ति ने पूछा- सर, अगर आप बुरा न मानें, तो क्या आप आरक्षित श्रेणी से हैं। जिसका अर्थ है कि क्या मैं अनुसूचित जाति से हूं। जब मैंने कहा, 'हां' तो उन्होंने कहा कि वे एससी (लोगों) को अनुमति नहीं देते हैं।
पूर्व मंत्री शेखर ने भाजपा छोड़ दी थी और मई 2023 में चित्रदुर्ग जिले के होसदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन, कांग्रेस के बीजी गोविंदप्पा चुनाव जीते जबकि शेखर चौथे स्थान पर रहे थे। आरएसएस की कर्नाटक इकाई ने उनके आरोप को खारिज किया और कहा कि संगठन के किसी भी कार्यालय में कहीं भी कोई रजिस्टर नहीं है। कोई भी आरएसएस मुख्यालय में कहीं भी जा सकता है।
एक बयान में आरएसएस ने कहा, गूलीहट्टी शेखर ने कहा है कि यह घटना विधानसभा चुनाव से कम से कम चार महीने पहले हुई थी, उसके बाद आरएसएस के कई नेताओं से मिले, लेकिन उन्हें कभी भी अपने साथ हुए कथित 'अपमान' के बारे में नहीं बताया। यह हैरान करने वाला है कि वह घटना के 10 महीने बाद एक बयान जारी कर रहे हैं। इसमें आगे कहा गया है कि आरएसएस खुली मानसिकता के साथ सभी का स्वागत करता है।