चीन गलतफहमी का शिकार ज्यादा है और उसे इस बार यह गफलत भारी पड़ सकती है। पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि चीन के पास इस समय सामरिक संसाधन, आर्थिक क्षमता भारत से कहीं ज्यादा है।
इसी घमंड में वह अपनी विस्तारवादी नीतियों के जरिए लगभग सभी पड़ोसी देशों को दबाने में लगा रहता है। लद्दाख क्षेत्र में चीन की घुसपैठ, भारतीय भू-भाग वाले क्षेत्र में उसका काबिज हो जाना, 15 जून को भारतीय सैनिकों के साथ हिंसक झड़प इसी तरह की सोच का नतीजा है, लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए भारत की सैन्य शक्ति कई गुना तक बढ़ चुकी है।
पूर्व एयर वाइस मार्शल का कहना है कि भारत ने इससे पहले पाकिस्तान के साथ तीन युद्ध और एक करगिल जैसा स्थानीय युद्ध लड़ा है। भारत ने पड़ोसी देश को सभी में हराया है।
करगिल की चोटियों से घुसपैठियों को खदेड़ना और उन पर कब्जा जमाना अपने आप में एक मिसाल है। इसके अलावा भारतीय सुरक्षा बल पिछले तीन दशक से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में उग्रवाद का सामना करके विशेष सैन्य कौशल हासिल कर चुके हैं।
युद्ध नहीं चाहते, लेकिन डरते भी नहीं
एनबी सिंह का कहना है कि भारत कभी भी युद्ध का पक्षधर नहीं रहा। पाकिस्तान के साथ भी युद्ध की शुरुआत भारत ने नहीं की। नेपाल, भूटान, मालदीव, श्रीलंका समेत भारत अपने सभी पड़ोसियों का आदर करता है।
यहां तक कि चीन के साथ भी द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूती देने का ही प्रयास किया है, लेकिन चीन ने हमेशा इसका दुरुपयोग किया। इस बार पड़ोसी देश ने परेशानी बढ़ाने के लिए बिल्कुल गलत समय चुना।
एक तरफ दुनिया के देश कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं। भारत में भी संक्रिमितों की संख्या साढ़े पांच लाख को पार कर रही है। ऐसे समय में चीन की सेना भारत के क्षेत्र में घुसपैठ करके आंख दिखा रही है।
एयरवाइस मार्शल का कहना है कि चीन को अपनी कोशिशों से बाज आना चाहिए। यदि भारत पर सैन्य टकराव थोपा गया तो भारत इसका सीना ठोक कर जवाब देने में सक्षम है।
प्रधानमंत्री ने कड़ा संदेश दे दिया है
एयरवाइस मार्शल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को मन की बात कार्यक्रम में आए थे। उन्होंने कड़ा संदेश दे दिया है। सिंह का कहना है कि भारत ने विश्व में अपनी एक पहचान बनाई है।
हमारे अमेरिका, रूस के सामरिक साझीदारी के रिश्ते हैं। यूरोपीय देश, इसराइल सैन्य साजो सामान के आयात में हमारा सहयोगी है। एनबी सिंह के अनुसार भारत को आज दुनिया के कई देशों का समर्थन मिल रहा है।
यह चीन के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। भविष्य में दक्षिण चीन सागर से लेकर पाक अधिकृत कश्मीर तक में उसे अपनी परियोजनाओं को लेकर भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
वाइस एयर मार्शल ने कहा कि चीन को 1962 के मुगालते से बाहर आ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सैन्य बल भी 1962 की साइकोफैंसी से बाहर निकलने में जरा भी परहेज नहीं करेंगे।
भारतीय वायुसेना दुनिया की चार चुनिंदा वायुसेनाओंं में एक है। हमारे पास सुखोई, मिराज, जगुआर, मिग सिरीज के फाइटर जेट हैं। चिन्हुक, अपाचे, एमआई 17 जैसे हेलीकाप्टरों का बेड़ा है।
इन सबसे ज्यादा बड़ी बात है कि भारत के पास मनोबल के मामले में श्रेष्ठ फाइटर पायलट, युद्ध के रणनीतिकार, सैनिक हैं। एयर वाइस मार्शल का कहना है कि भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना तीनों के पास अपनी खूबियां हैं। इसका मुकाबला करना चीन के लिए आसान नहीं होगा।
चीन को समझना चाहिए
भारत पड़ोसी देश की धौंस के आगे झुकने वाला नहीं है। एनबी सिंह का कहना है कि डोकलाम विवाद के बाद ही चीन को इसे समझ लेना चाहिए था। लद्दाख में भी भारत ने कहीं मोर्चा नहीं छोड़ा है।
वहां हमारे आर्टिलरी, इफैंट्री, स्पेशल फोर्सेज के जवान तैनात है। सेना ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टी-90, भीष्म टैंक, बोफोर्स, अमेरिका से आई मीडियम रेंज की तोप आदि की तैनाती कर दी है।
इसके समानांतर वायुसेना ने भी लद्दाख में अपना कौशल दिखाना शुरू कर दिया है। एनबी सिंह के अनुसार भारत के पास छोटी से लेकर लंबी दूरी तक की मार करने वाली विभिन्न श्रेणी की मिसाइल समेत अन्य साजो-सामान है।
लद्दाख में आकाश प्रतिरक्षी मिसाइल प्रणाली की तैनाती से साफ है कि भारत चीन की मंशा को सही तरीके से भांप रहा है। एयरवाइस मार्शल का कहना है कि भारत मोर्चे पर डटा हुआ है और इस बार चीन को अपने क्षेत्र में कब्जा कर लेने जैसा कोई अवसर नहीं देने वाले हैं।