न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत को जगह मिलेगी या नहीं, इस पर जल्द ही फैसला होना है, सिओल में 24 जून को ग्रुप के देश गोष्ठी करेंगे और आवेदनों पर आमराय बनाकर फैसला करेंगे।
बीते चार दशकों से एनएसजी बिरादरी से अलग भारत की इंट्री इसबार संभव लग रही है, अड़चनें भी हैं, और सबसे बड़ी अड़चन है चीन...।
वजहें कई हैं, जो चीन भारत का साथ नहीं देना चाहता। इस पर भारत सरकार प्रत्यक्ष तौर पर और दरवाजे के पीछे से भी चीन को मनाने के लिए हर संभव कोशिश भी कर रही हैं। मसलन, अब मीडिया में ये खबर आई है कि केंद्र सरकार के विदेश सचिव और पीएम मोदी के विश्वासपात्र एस. जयशंकर ने हाल ही चीन का दो दिवसीय गुप्त दौरा किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इस बात पर मुहर लगाई कि चीन को एनएसजी पर भारत के समर्थन में लाने के लिए एस. जयशंकर बीते 16-17 जून को बीजिंग में थे। इस मौके पर भारत-चीन संबंधों पर द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें एनएसजी मुद्दा था।
इससे पूर्व प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से पहले वह दक्षिण कोरिया की राजधानी में भी भारत के लिए समर्थन मांगने जा चुके थे। एस जयशंकर की सियोल यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 24 जून को दक्षिण कोरिया की इस राजधानी में 48 देशों की नेशनल एटोमिक ट्रेडिंग ब्लॉक की बैठक होनी है। यहां भारत की सदस्यता के संबंध में चर्चा होनी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पिछली बार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की चीन यात्रा के मौके पर भी एस. जयशंकर ने चीन से एनएसजी पर समर्थन की बात की थी।
चीन लगातार एनपीटी यानी परमाणु अप्रसार संधि पर भारत के दस्तखत न होने को वजह बनाकर भारत का एनएसजी में विरोध कर रहा है। चीन का मत है कि अगर भारत को एनएसजी के लिए एंट्री मिलती है तो पाकिस्तान को भी मिलनी चाहिए। तुर्की भी पाकिस्तान के पक्ष में है।
वहीं हाल ही में भारत के समर्थन में कई देश आए हैं, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, मेक्सिको और स्विटजरलैंड शामिल हैं। वहीं रूस ने भी सशर्त समर्थन करने की बात कही है। इंडिया टुडे को दिए साक्षात्कार में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने भारत का समर्थन करने और चीन से भारत का विरोध करने का कारण पूछने की बात कही।
बता दें कि एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने के कारण चीन भारत की एनएसजी सदस्यता का पुरजोर विरोध कर रहा है। इस हफ्ते के शुरूआत में चीन के अधिकृत मीडिया ने भी भारत को एनएसजी सदस्यता को चीन पाकिस्तान के संबंधों पर खतरा बताया था। इससे पूर्व चाइना के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि एनएसजी की सदस्यता के लिए नॉन एनपीटी देशों के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जरूरत है।
बता दें कि एनएसजी के मुद्दे पर जहां अमेरिका जैसे प्रमुख देश पूरी तरह भारत के समर्थन में हैं वहीं चीन इस पर लगातार अड़ंगेबाजी कर रहा है। हालांकि चीन के अलावा टर्की, साउथ अफ्रीका, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश भी एनएसजी पर भारत के समर्थन में नहीं हैं।
लेकिन इससे निपटने के लिए हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्विटजरलैंड और मैक्सिको जैसे देशों की यात्रा कर उनका समर्थन हासिल करने में सफलता पाई थी।