भारतीय नौसेना का स्वदेशी टॉरपीडो 'वरुणास्त्र' के लिए इंतजार खत्म हो गया है। 'वरुणास्त्र' की पहली खेप नौसेना के लिए रवाना कर दी गई है। इसे चलाए जाने के बाद 40 किलोमीटर के दायरे में किसी भी जहाज या पनडुब्बी की तबाही निश्चित मानी जाती है।
जीपीएस से लक्ष्य खोजने वाला वरुणास्त्र
वरुणास्त्र नामक यह पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो जीपीएस की मदद से अपने लक्ष्य को भेद सकता है। एक टन से अधिक वजनी वरुणास्त्र अपने साथ 250 किलो तक का वॉरहेड ले जा सकता है। उसका गाइडेंस सिस्टम भी उन्नत है। भारत के पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल भी हैं।
नौसेना की ताकत बढ़ाएगा पूर्ण स्वदेशी टारपीडो 'वरुणास्त्र'
डीआरडीओ का उत्पाद है 'वरुणास्त्र'
'वरुणास्त्र' का निर्माण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के भारतीय नौसेना के विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला ने किया है। इसे बनाने में डीआरडीओ की मदद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टेक्नोलॉजी ने भी की है। यह हथियार युद्ध के दौरान पैदा होने वाली कई स्थितियों के अनुकूल है।
'वरुणास्त्र' के जहाज संस्करण को औपचारिक रूप से 26 जून 2016 को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने नौसेना में शामिल किया था। अभी तक भारतीय नौसेना विदेश से खरीदे गए टॉरपीडो का ही इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन अब वरुणास्त्र के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना स्वदेशी विध्वंसक से लैस हो जाएगी।