कर्नाटक हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिकाकर्ता को विदेशी कंपनियों को जारी किए जा रहे आधार इंफ्रास्ट्रक्चर अनुबंधों को चुनौती देने के खिलाफ राहत मांगने का निर्देश दिया। चूंकि याचिकाकर्ता कर्नल (सेवानिवृत्त) मैथ्यू थॉमस ने आधार की गोपनीयता संबंधी चिंताओं के संबंध में पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, इसलिए मुख्य हाई कोर्ट के न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति अशोक एन किनागी की खंडपीठ ने कहा कि उनके लिए इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के सामने ही रखना उचित होगा।
हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इससे राहत लेने का निर्देश दिया तो उसके दरवाजे खुले रहेंगे। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि चार विदेशी संस्थाओं को आधार के लिए डेटा और बायोमेट्रिक्स एकत्र करने का काम सौंपा गया था। मामले की पैरवी करने के लिए वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भारतीय नागरिकों को विदेशी संस्थाओं को सौंपे जाने के संबंध में जानकारी दी और कहा कि चूंकि आधार फोन नंबर और बैंक खातों से जुड़ा है, इसलिए विदेशी संस्थाओं के हाथों में यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगी।