मुंबई की एक विशेष अदालत ने धोखाधड़ी के 19 साल पुराने मामले में तीन बैंकरों को दोषी ठहराया। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता है और देश के समग्र विकास में बाधा आती है।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश डीपी सिंगाडे ने देना बैंक के तीन अधिकारियों श्रींकात पडाले (51 वर्षीय), विजया नायर (46 वर्षीय) और वी राधाकृष्णन (61 वर्षीय) को भ्रष्टाचार निरोधक कानून और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आरोपों का दोषी पाया। 30 मार्च को पारित आदेश शनिवार को उपलब्ध कराया गया।
अदालत ने इन तीनों के अलावा नरगिस दिवेंत्री (49 वर्षीय) को भी मामले में दोषी पाया और सभी आरोपियों को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी अधिकारियों ने 2003 में यहां देना बैंक की कालबादेवी शाखा को धोखा देने और गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने के लिए लोगों के साथ आपराधिक साजिश रची थी।
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आरोपियों ने ऋण सुविधाएं देने के लिए कुछ निजी पक्षों का पक्ष लिया था और धोखाधड़ी में बैंक को 2.35 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने उचित संदेह से परे आरोपियों के खिलाफ आरोपों की काफी पुष्टि की है।
पीठ ने कहा कि इस प्रस्ताव पर दो राय नहीं हो सकती कि बैंक का पैसा जनता का पैसा है और ये अपराध प्रकृति में ज्यादा जघन्य हैं, क्योंकि इनका इरादा राज्य के आर्थिक ताने-बाने और वित्तीय ढांचे को नष्ट करना था। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध बहुत सारे हो रहे हैं और इसके कारण राष्ट्र का समग्र विकास बाधित हुआ है और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।