केरल सरकार ने सोमवार को केंद्र पर देश के संघीय ढांचे के खिलाफ रुख अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि यह राज्य के गंभीर वित्तीय संकट का कारण है, जिससे वह कुछ समय से जूझ रहा है।
संसाधन जुटाने की पहल बुरी तरह प्रभावित
राज्य के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने आरोप लगाया कि यह केंद्र सरकार द्वारा कृत्रिम रूप से पैदा की गई वित्तीय दुर्दशा है। विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की संसाधन जुटाने की पहल बुरी तरह प्रभावित हुई है क्योंकि केंद्र सरकार केआईआईएफबी द्वारा जुटाई गई और खर्च की गई धनराशि को केरल की समग्र उधारी का हिस्सा मान रही है।
क्या है केआईआईएफबी?
उन्होंने कहा कि मगर राज्य सरकार ने केरल बुनियादी ढांचा निवेश कोष बोर्ड (केआईआईएफबी) द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के लिए धन देने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। बता दें, केआईआईएफबी केरल की एक सरकारी एजेंसी है जो बाजारों से धन जुटाकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का वित्तपोषण करती है।
बालगोपाल ने आरोप लगाया, 'केंद्र द्वारा अपनाए गए संघीय विरोधी रुख के कारण केरल गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। इन सभी हालातों के बावजूद, केआईआईएफबी विभिन्न परियोजनाओं पर 29,100 करोड़ रुपये खर्च कर सका।'
उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिकूल कारकों की वजह से केआईआईएफबी की गतिविधियां धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इन आरोपों को खारिज कर दिया कि इसकी परियोजनाओं का क्रियान्वयन ठप है।
एक हजार परियोजनाओं को मंजूरी दी
वाम सरकार ने केआईआईएफबी के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लागू करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने पर्यटन, परिवहन, शिक्षा, आईटी, स्वास्थ्य आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 86,143.49 करोड़ रुपये की 1,110 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।