युवाओं के पास हैं नए आईडिया
चित्र मंदिर फिल्म्स के डायरेक्टर और फिल्म निर्माता अशोक धींगरा ने अमर उजाला को बताया कि मुंबई या इस जैसे किसी बड़े मेट्रो शहरों में पले-बढ़े युवाओं के पास चीजों को देखने का एक सीमित तरीका होता है। वे इसी माहौल में रहते-रहते चीजों को एक ख़ास तरीके से देखने के आदी हो गए हैं, उनकी सोच भी इससे प्रभावित होती है। जबकि देश के कोने-कोने से आ रहे अलग-अलग परिवेश के नए युवाओं में उन्हीं चीजों को देखने की एक नई दृष्टि है।
यह नई सोच उसी प्लाट को एक नए तरीके से पेश कर रही है जो लोगों को पसंद आ रही है। यह बदलाव कहानी के विषय, डायलॉग डिलीवरी, भाषा, बोली, पहनावा और प्रस्तुतीकरण को अलग तरह से प्रस्तुत करने में मदद कर रही है। चूंकि, यह पारंपरिक सिनेमाई सोच से बिलकुल अलग है और दर्शकों के लिए बिलकुल नई है, ये चीजें लोगों को पसंद भी आ रही हैं।
अशोक धींगरा के मुताबिक, ओटीटी के युग में किसी एक प्रोजेक्ट से बड़ी कमाई करने की बजाय छोटे-छोटे प्रोजेक्ट से बेहतर कमाई से सिनेमा का अंदाज बदला है। अब काफी कम लागत में भी फ़िल्में बन रही हैं और दर्शक इन्हें पसंद भी कर रहे हैं। यदि इन युवाओं को थोड़ा प्रशिक्षण मिल जाए तो, ये नई प्रतिभाएं सिनेमा को एक नई ऊंचाई तक ले जाने में मदद कर सकती हैं। उनका मानना है कि जियो फिल्म्स, महावीर जैन और फिक्की का यह कदम युवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बेहतर प्रयास है और इसका बेहतर परिणाम निकलेगा।