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Assam: बाल विवाह अभियान पर असम के सीएम बोले, BJP सरकार के खिलाफ गरीबों को भड़काया जा रहा

Mon, 20 Mar 2023 02:16 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरमा ने कहा कि बाल विवाह से लड़ने के लिए अगले साल के बजट में 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और इसका एक हिस्सा अधिवक्ताओं को भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा ताकि सजा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, एक समर्पित हेल्पलाइन, जागरूकता अभियान और पीड़ितों के पुनर्वास सहित अन्य कदम भी उठाए जाएंगे।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि असम में बाल विवाह उन्मूलन के लिए काम कर रही भाजपा सरकार के खिलाफ गरीब लोगों को भड़काने की कोशिश एक सामंती मानसिकता कर रही है। विधानसभा में बोलते हुए सरमा ने कहा कि उनकी सरकार 2026 तक बाल विवाह उन्मूलन के लिए काम कर रही है और हर दो-तीन महीने में विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
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कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ के एक सवाल के जवाब में उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। कहा कि विपक्ष बाल विवाह अभियान के खिलाफ हैं। सरमा ने कहा कि बाल विवाह से लड़ने के लिए अगले साल के बजट में 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और इसका एक हिस्सा अधिवक्ताओं को भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा ताकि सजा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, एक समर्पित हेल्पलाइन, जागरूकता अभियान और पीड़ितों के पुनर्वास सहित अन्य कदम भी उठाए जाएंगे।

सरमा ने और क्या कहा? 
मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा, 'मैं किसी 22 वर्षीय लड़की को गुवाहाटी में पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए प्रवेश लेते हुए देखता हूं तो मुझे अच्छा लगता है, वहीं जब मैं चेंगा या बागबोर (बड़ी मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों) जैसे स्थानों पर जाता हूं, तो मुझे दो बच्चों के साथ उसी उम्र की लड़की दिखाई देती है। ये गलत है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'विधायकों, डॉक्टरों और इंजीनियरों के इतने बच्चे नहीं हैं। लेकिन, जब सरकार इन युवा लड़कियों को बचाने के लिए गरीबों के लिए कुछ करने की कोशिश करती है, तो वे लोगों को भड़काते हैं कि भाजपा उनके जीवन में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही है।'

सरमा ने कहा, यह "सामंती" मानसिकता है जो अपने लिए जीवन का एक तरीका और गरीब लोगों के लिए दूसरा रास्ता तलाशती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ अभियान कानून के तहत चलाया जा रहा है और इसलिए अदालत आरोपी को जमानत नहीं दे रही है। 

कांग्रेस विधायक पुरकायस्थ ने इसपर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि पुलिस यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के तहत मामलों को कैसे साबित करेगी? क्योंकि पीड़िता अपने पति या माता-पिता के खिलाफ गवाही देने को तैयार नहीं हो सकती हैं? इसका जवाब देते हुए सरमा ने कहा कि यह स्थापित करने में कोई समस्या नहीं होगी। विवाह से संतान होने पर अपराध। उन्होंने कहा कि अगर बच्चा नहीं है तो समस्या हो सकती है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि 90 फीसदी मामलों में दोषसिद्धि हो जाएगी।
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