जवाब: कोविड के समय यदि हम एचबीए-1सी का परीक्षण करते हैं तो हमें पिछले तीन महीनों का औसत शुगर के स्तर की जानकारी मिल जाती है। यदि इसके स्तर में बढ़ोतरी हो जाती है तो इसका मतलब है कि व्यक्ति कोविड संक्रमित होने से पहले ही मधुमेह का मरीज था। यदि एचबीए-1सी सामान्य है तो हमें कोविड के ठीक होने के बाद ब्लड शुगर के स्तर की दोबारा जांच करानी चाहिए। इस दौरान स्टेरॉयड थेरेपी (यदि उपयोग की जाती है) को बंद कर दिया जाए तो उसके बाद ग्लूकोज का स्तर सामान्य हो जाएगा। यदि बीमारी से ठीक होने या स्टेरॉयड या दोनों के बंद होने के कुछ सप्ताह बाद भी ब्लड शुगर बढ़ा रहता है तो जरूर यह संभावना बढ़ जाती है कि कहीं कोविड की वजह से तो शुगर नहीं हुई। हालांकि अभी तक ऐसे केस दर्ज नहीं हुए हैं।
जवाब : सही मायने में यह परीक्षण डॉक्टरों को यह जानने में मदद करता है कि क्या कोविड 19 रोगी में ब्लड शुगर का स्तर अस्थायी है, जिसकी हमने अभी चर्चा की है। इन कारणों को समझने और बीमारी के दीर्घकालीन प्रबंधन की आवश्यकता है। पहले मामले में, जैसे ही व्यक्ति कोविड से ठीक होता है, या जब स्टेरॉयड बंद कर दिया जाता है, तो शुगर का स्तर सामान्य हो जाता है। इन रोगों को ठीक होने के बाद अपने शुगर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए किसी दवा की आवश्यकता नहीं होती है।
जवाब: कोई भी संक्रमण या वायरल बुखार शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है। यह मूल रूप से उस तंत्र का परिणाम है, जिसे शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए नियोजित करता है। कुछ मामलों में उस संक्रमण के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाएं शुगर के स्तर को बढ़ा देती हैं। कोविड में कई बार गंभीर रोगियों को स्टेरॉयड देने की आवश्यकता पड़ी, जिससे रोगियों की ब्लड शुगर बढ़ गई।
सवाल: क्या डायबिटीज के चलते कोविड रोगियों का इलाज मुश्किल हुआ।
जवाब: अधिकतर मामलों में अच्छी तरह से नियंत्रित मधुमेह वाला व्यक्ति कोविड उपचार के लिए उसी तरह प्रतिक्रिया करता है जैसे एक गैर-मधुमेह रोगी करता है। हालांकि लंबे समय से और खराब नियंत्रित मधुमेह वाले लोगों में या गुर्दे या हृदय रोग जैसी मधुमेह संबंधी जटिलताओं वाले लोगों में कोविड का इलाज अधिक जटिल हो सकता है।
जवाब: मधुमेह से गुर्दे, हृदय और आंखों में जटिलताएं हो सकती हैं। ऐसे रोगियों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है और उन्हें अपने ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य रखने के लिए आहार, व्यायाम और दवा के बारे में बहुत सावधानी और सतर्कता अपनानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चूंकि ऐसे रोगियों में गंभीर कोविड होने का अधिक खतरा होता है, इसलिए उन्हें टीका अवश्य लगवाना चाहिए। वैक्सीन गंभीर बीमारी और मृत्यु दर की संभावना को काफी कम कर देता है। यदि कोई मधुमेह रोगी कोविड-19 से संक्रमित होता है तो उस व्यक्ति को इसके बारे में तुरंत डॉक्टर को सूचित करना चाहिए। इससे उनके उपचार करने में डॉक्टर को अधिक सहूलियत होगी।