राजस्थान के बूंद जिले में रहने वाले हंसराज पंछल कोरोना पॉजिटिव निकले और ब्लैक फंगस की चपेट में आने के बाद उनकी मौत हो गई। पंछल का इलाज जयपुर के निजी अस्पताल में चल रहा था और उनके इलाज का खर्च सात लाख रुपये तक गया। पंछल के भाई का कहना है कि राज्य सरकार ने दावा किया है कि अगर आपके पास सरकारी मेडिक्लेम है तो आपका इलाज मुफ्त में होगा लेकिन कोई इसे मान नहीं रहा है।
मध्यप्रदेश: मेडिक्लेम का भुगतान नहीं कर रहीं कंपनियां
राज्य के एक निवासी राहुल शर्मा 25 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुए लेकिन हालत बिगड़ने के बाद वो कोविड केयर सेंटर में भर्ती हो गए। राहुल ने एक मई को इंश्योरेंस कंपनी को अपनी हालत के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद कंपनी ने राहुल से अस्पताल के बिल और डिस्चार्ज पेपर मांगे। राहुल का अस्पताल का खर्च 80000 रुपये का आया। लेकिन कंपनी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। राहुल ने बताया कि 80000 मेरे लिए कोई छोटी रकम नहीं थी क्योंकि मेरे पास कोई नौकरी नहीं है, इसलिए अस्पताल का बिल चुकाने के लिए मुझे गोल्ड लोन लेना पड़ा।
इंश्योरेंस एजेंट का मत
स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट अमित कुमार पांडेय का कहना है कि कैशलेस सुविधा होने के बाद भी कई अस्पताल मरीजों का इलाज इससे नहीं कर रहे थे। इसलिए मरीज अपना इलाज पैसे देकर कर रहा है और इंश्योरेंस कंपनी से उम्मीद लगाए बैठा कि वो कवरेज देंगे। हालांकि जानकारों का कहना है कि एजेंट किसी का भी क्लेम निरस्त नहीं कर सकते। जानकारों का कहना है कि लोगों के पास पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए और आवश्यक डॉक्यूमेंट होने चाहिए।