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किसान आंदोलन: राकेश टिकैत ने कहा- जब तक मांगें नहीं मानेगी सरकार, डटे रहेंगे किसान

सार

राकेश टिकैत अपने चिर परिचित अंदाज में कहते हैं 'केंद्र सरकार ने अपने तीन काले कानून वापस ले लिए हैं। अच्छी बात है। हम सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का क्या हुआ?
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राकेश टिकैत - फोटो : ANI
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विस्तार
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किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार डाल-डाल चल रही है तो भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पात-पात। अमर उजाला से विशेष बातचीत में राकेश टिकैत कहते हैं कि यह भी कोई बात हुई। तीन कानून खुद सरकार लाई और 15 महीने बाद खुद वापस लेकर कह रही है कि किसान अब आंदोलन वापस लेकर लौट जाएं तो हम चले जाएं। टिकैत का कहना है कि आंदोलन तब तक खत्म नहीं होने वाला, जब तक हमारी मुख्य मांगों को केंद्र सरकार मान नहीं लेती। वो दावा करते हैं कि किसानों की समस्या का समाधान हुए बगैर वापस नहीं लौटेंगे।

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राकेश टिकैत अपने चिर परिचित अंदाज में कहते हैं 'केंद्र सरकार ने अपने तीन काले कानून वापस ले लिए हैं। अच्छी बात है। हम सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का क्या हुआ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तो एमएसपी पर पीएचडी है। वह सब जानते हैं। जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो एमएसपी का खूब समर्थन कर रहे थे। अब लागू कर दें। 23 फसलों पर दे दें किसानों को एमएसपी पर खरीद की गारंटी। पूरे देश में एक साल के भीतर किसानों पर आंदोलन के दौरान 45-50 हजार मुकदमें दर्ज हुए हैं। हमारे 700 के करीब किसान भाई शहीद हुए हैं और 1500 के करीब ट्रैक्टर का भी मसला है। मान लें हमारी मांग। किसानों का बिजली का बिल अब तीन गुणा अधिक आ रहा है। गृह राज्य मंत्री अजम मिश्र टेनी के बेटे ने किसानों पर गाड़ी चढ़ाई, गोली चलाई। उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दें। हम लौट जाएंगे?'

कान खोलकर सुन ले सरकार: टिकैत
आगे की रणनीति और कृषि कानूनों की वापसी के फैसले पर टिकैत कहते हैं कि सरकार हमारे देश की है। हम उसका सम्मान करते हैं, लेकिन कान खोलकर सुन ले, हम बिना मुद्दों का समाधान हुए यहां से नहीं हटने वाले। राकेश टिकैत ने कहा कि हमारी जगह दिल्ली बॉर्डर की ये सड़कें नहीं हैं। खेत और खलिहान हैं। हमारे घर और गांव हैं। खेती-बाड़ी है। हमें यहां सड़कों पर आकर डेरा डालने के लिए मजबूर किया गया है। हम इस तरह से जाने वाले नहीं हैं। हम हवा हवाई बातों, अफवाहों से नहीं डरते। 
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राकेश टिकैत का कहना है कि कांग्रेस सरकार का शासन था। किसान आंदोलन कर रहे थे। उस दौरान भी हमारे ट्रैक्टर तोड़े गए थे। सरकार ने हमें मुआवजे में नए ट्रैक्टर दिए थे। यह सरकार भी दे दे। हम लौट जाएंगे। अपनी खेती-बाडी करेंगे। हमें भी मीडिया से खबरें सुनने को मिलते हैं कि पंजाब के किसान लौट रहे हैं। ऐसा हो रहा है, वैसा हो रहा है। टिकैत ने साफ कहा कि यह सब हवा हवाई बाते हैं। किसान एकजुट है। एमएसपी, बिजली के बिल, मुकदमों की वापसी, शहीद किसानों के लिए मुआवजा और गृह राज्यमंत्री टेनी की बर्खास्तगी की मांग कर रहा है। बिना इन मांगों के पूरा हुए या केंद्र सरकार की ठोस पहल के वह लौटने वाला नहीं है। जब हमें जरूरत पड़ेगी, एक आवाज पर फिर दिल्ली के पास किसानों का जमावड़ा खड़ा कर देंगे।

'केंद्र सरकार ने क्या किया है हमें कुछ नहीं पता, हमसे कोई संपर्क नहीं'
राकेश टिकैत को बस इतना पता है कि केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कृषि  निरसन अधिनियम-2021 अस्तित्व में आ चुका है। अब सरकार दोबारा इन तीनों विषयों पर कानून बनाकर किसानों को नाराज करने या उनका नुकसान करने की हिमाकत नहीं करेगी। इसके बारे में टिकैत कहते हैं कि सरकार को इन कानूनों में खामियों का एहसास हुआ। उसे अपनी गलतियों को स्वीकार करने में समय लगा। भले ही किसी मजबूरी में स्वीकार किया हो। लेकिन इसके आगे भाकियू प्रवक्ता को कुछ भी पता नहीं है। 

वह कहते हैं कि जनवरी 2021 के बाद से सरकार अथवा उसके प्रतिनिधि किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया है। न उन्हें संयुक्त किसान मोर्चा से एमएसपी या किसानों के मुद्दे पर समिति गठित करने के लिए पांच लोगों का नाम मांगे जाने की जानकारी है। उन्हें यह भी नहीं पता कि पंजाब, हरियाणा के कुछ किसान नेताओं में कोई फूट की स्थिति है और वे आंदोलन को अधूरा छोड़कर वापस लौटना चाहते हैं। राकेश टिकैत का कहना है कि वह अफवाहों, हवा हवाई बातों पर कोई ध्यान नहीं देते।

आगे की रणनीति 4 दिसंबर के बाद पता चलेगी 
यह पूछने पर कि आगे की क्या रणनीति है, राकेश टिकैत कहते हैं कि अभी कैसे बता सकते हैं। रणनीति नहीं, हमारी छोटी-छोटी कुछ मांगे हैं। सरकार उसे मान ले और किसान लौट जाएं। 4 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक है। उसमें हम सभी किसान बैठकर निर्णय लेंगे। विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करेंगे। तभी पता चल पाएगा कि आगे क्या होगा। फिलहाल इतना तय है कि बिना एमएसपी पर लिखित गारंटी लिए लौटने वाले नहीं हैं।

'जिसको जाना है जाए, हम कौन हैं रोकने वाले'
यह पूछने पर कि पहले भी कुछ किसान संगठनों ने आंदोलन से अपने आपको अलग कर लिया था। खबर आ रही है कि कुछ संगठन कानून वापस होने के बाद सरकार की अपील पर लौटने का मन बना रहे हैं? टिकैत ने कहा कि देश का किसान आंदोलन में शामिल है। डटा हुआ है। बाकी जिसको जाना हो जाए। जाने वाले को कौन रोक सकता है। रहा सवाल फूट का तो हमारे बीच में न तो कोई फूट है और न ही बिखराव। बल्कि हम तो यह कहेंगे कि इस आंदोलन ने हमारा दायरा और परिवार काफी बड़ा कर दिया है। अब आने वाले समय में किसी भी सरकार को हम किसानों की अनदेखी करना भारी पड़ेगा।

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