कृषि कानूनों पर कोई सुलह न होने से नाराज किसानों ने शनिवार से दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-8 बंद करने का निर्णय किया है। इससे उत्तर भारत के राज्यों का देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों से संपर्क टूट जाएगा, जिससे खाद्यान्नों, सब्जियों-फलों को दूसरे राज्यों में पहुंचाने में भारी बाधा पैदा होगी।
मुंबई से आने वाली औद्योगिक महत्व की वस्तुओं-उपकरणों की सप्लाई में बाधा पड़ने से देश के शेष भागों में निर्माण गतिविधियों में ठहराव पैदा हो सकता है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। अनुमान है कि दिल्ली-जयपुर हाइवे बंद होने से देश को रोजाना 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
उत्तर भारत के दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के व्यापारी यहां किसानों से सामान खरीदकर दिल्ली-जयपुर हाईवे के रास्ते मुंबई, महाराष्ट्र के अन्य भागों, अहमदाबाद, सूरत और गुजरात के अन्य हिस्सों तक पहुंचते हैं। इसी रास्ते से दक्षिणी राज्यों से भी व्यापार होता है। अगर किसानों ने दिल्ली-जयपुर हाइवे बंद किया तो इन सभी राज्यों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इससे भारी आर्थिक नुकसान होगा।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के प्रवक्ता हरीश सब्बरवाल ने अमर उजाला को बताया कि किसी ट्रक को एक दिन के लिए भी रोकने पर आगे के दो दिन से चार दिनों तक के व्यापार पर असर पड़ता है। यह प्रति ट्रक मिलने वाले किराये के अनुसार 15 से 20 हजार रुपये प्रतिदिन या इससे भी अधिक हो सकता है। इस प्रकार अगर इस हाइवे से गुजरने वाले हजारों ट्रकों का संचालन बंद होता है तो इस कारण ट्रांसपोर्ट उद्योग को रोजाना 750 करोड़ से एक हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। अगर यह बंद लंबा खिंचता है तो इससे ट्रांसपोर्ट उद्योग को भारी नुकसान होगा जो पहले ही कोरोना काल के कारण दबाव में चल रहा है।
भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने बताया कि कोरोना काल के बाद उद्योग धीरे-धीरे उठने की कोशिश कर रहे हैं। दीपावली के बाद व्यापार फिर कम हो गया है। इसके बाद दोबारा फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत से बाजार में मांग बढ़नी शुरू होती है। इस महत्वपूर्ण समय पर अगर यह बंद होता है तो इससे उद्योग और व्यापारियों को काफी नुकसान होगा।
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, नोएडा के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के क्षेत्रों में 20 हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां निर्माण का कामकाज करती हैं। इन कंपनियों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा सामान मुंबई-जयपुर हाईवे के रास्ते दिल्ली होते हुए नोएडा-गाजियाबाद तक आता है। यह मार्ग ठप होने से आवश्यक कच्चे सामान की आपूर्ति में बाधा पड़ेगी। इससे कच्चे माल की कीमतों में भी बढ़ोतरी होगी जो पहले ही महंगाई की मार से बेहाल है।
श्रमिक संगठनों के साथ आने से गहराया संकट
वहीं, वामपंथी श्रमिक संगठनों ने भी किसानों के 12-14 दिसंबर के बंद कार्यक्रम का समर्थन कर दिया है। इससे दिल्ली-जयपुर हाइवे के बंद होने और टोल प्लाजा पर संकट गहरा सकता है। एआईटीयूसी की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा है कि उनके संगठन किसानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को किसान संगठनों से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और ज्यादातर गरीब किसान ही श्रमिकों की भूमिका भी निभाते हैं। जब तक सरकार किसानों की मांगे नहीं मानती है, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।