26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद सुनसान हुए सिंघु बॉर्डर पर फिर से रंग जमने लगा है। किसान अपने ट्रैक्टर और ट्राली लेकर धरनास्थल पर लौट रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर सुनसान हुए पंडाल, लंगर और मंच की रौनक फिर से लौटने लगी है। वहीं गर्मी के मौसम को देखते हुए किसानों ने अपनी ट्रालियों में पंखे और छोटे कूलर भी लगाना शुरू कर दिया है।
ठंड के बाद गर्मी से बचने के लिए भी किसानों ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। ठंड के चलते हर जगह से बंद किए गए पंडाल को खोला जा रहा है, ताकि ताजी हवा लोगों को मिलती रहे और गर्मी से राहत मिल सके। किसानों को हर समय ठंडा पानी मिलता रहे इसके लिए हर जत्थे में ठंडे पानी के जार और ठंडे पानी की बोतलें पहुंचाने की व्यवस्था शुरू हो गई है।
प्रदर्शन स्थल पर दोबारा से किसानों की भीड़ बढ़ने के बाद सभी जगह की लंगर सेवा फिर से शुरू हो गई है। इसके अलावा जगह-जगह किसानों के जत्थों को भी पहले की तरह खाना खिलाना शुरू कर दिया है। किसानों के स्वास्थ्य को देखते हुए कई एनजीओ ने फिर से अपने मेडिकल कैंप शुरू कर दिए हैं।
वहीं दूसरी तरफ खाली पड़े मंच पर फिर से किसान नेता जुटने लगे हैं। सुबह दस से शाम छह बजे तक किसान नेता लोगों को संबोधित कर रहे हैं। हरियाणा, पंजाब और यूपी के किसान फिर से किसान नेताओं को सुनने सिंघु बॉर्डर पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन पिछले 85 दिनों से जारी है। लेकिन गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के बाद सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से हजारों किसान अपने घरों को लौट गए थे। जिससे प्रदर्शन स्थल लगभग खाली से हो गए थे।