केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में पंजाब सरकार के साथ जो पत्राचार किया था, उसमें कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला दिया गया था। जिस तरह से किसान इतनी भारी संख्या में और विभिन्न उपकरणों के साथ शंभू बॉर्डर पर एकत्रित हुए हैं, वह इस बात की तरफ इशारा करता है कि किसानों को रोकने का प्रयास नहीं किया गया। किसानों के बीच कानून तोड़ने वाले ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जिनकी वजह से पड़ोसी राज्यों में अशांति और अव्यवस्था पैदा हो सकती है। पंजाब सरकार को आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। मौजूदा समय में शंभू बॉर्डर पर लगभग 16,000 किसानों की उपस्थिति बताई जा रही है। इसके अलावा वहां पर लगभग 1,300 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 250 कार, एक दर्जन मिनी बस और बाइक जैसे अनेक छोटे वाहन भी बताए जा रहे हैं। यह बात भी सामने आई है कि पंजाब सरकार ने ढाबी-गुजरां बैरियर पर 500 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ लगभग 4,500 किसानों को एकत्रित होने की इजाजत दे दी है।
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों की समस्याओं के हल को लेकर, किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के साझे प्रयासों को जोखिम में डाल दिया है। यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत सफल नहीं हुई है, जबकि हजारों किसान एमएसपी व कृषि ऋण माफी के लिए कानूनी गारंटी सहित अपनी मांगों को लेकर पंजाब-हरियाणा सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं। जाखड़ ने सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट में कहा, भगवंत मान के किसानों के वकील के रूप में काम करने से इन वार्ताओं का विफल होना तय था। मुख्यमंत्री मान के पास इन वार्ताओं की विफलता से लाभ उठाने के लिए सब कुछ है। भाजपा नेता ने दावा किया, अब वे (भगवंत मान) न केवल केंद्र सरकार को बदनाम करने में सक्षम होंगे, बल्कि उन किसानों का रुख दिल्ली की ओर मोड़ देंगे, जो शुरू से चंडीगढ़ तक मार्च करना चाहते थे। पंजाब के लोगों को आश्चर्य है कि ऐसे व्यक्ति को किसानों का प्रतिनिधित्व करने का वकालतनामा (अधिकार) किसने दिया, जो न केवल अपनी सरकार बनने के पांच मिनट के भीतर एमएसपी प्रदान करने के अपने वादे से मुकर गया, बल्कि पंजाब के किसानों को बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे में भी धोखा दिया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 15 फरवरी को एक प्रेसवार्ता में कहा था कि किसानों ने तो सेना के आक्रमण जैसा माहौल बना दिया है। ये लोग ट्रैक्टर, ट्रॉली और जेसीबी मशीन लेकर आ रहे हैं। इनके पास कई महीनों का राशन बताया जा रहा है। जब इस तरह का आह्वान किया जाता है, तो सुरक्षा का ध्यान देना बेहद जरूरी है। किसानों का जो तरीका है, उस पर ही आपत्ति है। दिल्ली जाने पर आपत्ति नहीं है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट है और दूसरे भी कई साधन हैं, उनमें जाएं। ट्रैक्टर और ट्राली, ये पब्लिक ट्रांसपोर्ट में नहीं आते हैं। ये तो खेती बाड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाला वाहन है। इसके बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी किसानों के प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताई। चंडीगढ़ हाई कोर्ट ने कहा, मोटर वाहन अधिनियम के तहत राजमार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग नहीं किया जा सकता। किसान इन वाहनों में ही अमृतसर से दिल्ली तक यात्रा कर रहे हैं। सभी लोग अपने अधिकारों के बारे में जानते हैं, लेकिन उनका संवैधानिक कर्तव्य भी है। वे उन्हें क्यों भूल जाते हैं। पंजाब सरकार पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने कहा, प्रदर्शनकारियों को बड़ी संख्या में क्यों इकट्ठा होने दिया जा रहा है। पंजाब सरकार सुनिश्चित करे कि लोग बड़ी संख्या में एकत्रित न हों।