एमएसपी की गारंटी सहित अन्य 13 मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों संगठनों के नेताओं ने देशभर में गैर-भाजपा सांसदों को मांग पत्र सौंपा है। संगठन ने सांसदों से मानसून सत्र में किसानों-मजदूरों की मांगों पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने की मांग की। साथ ही, किसानों के सभी मुद्दों को सदन में जोरशोर के साथ उठाने की मांग भी की है। कुछ सांसदों ने भी किसानों से वादा किया कि वे संसद के आगामी सत्र में किसानों-मजदूरों की मांगों को जोर-शोर से उठाएंगे। ताकि सरकार किसानों की मांगों को मान ले।
किसान नेताओं का कहना है कि गैर-भाजपाई सांसदों को दिए गए मांग पत्र में किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार की वादा खिलाफी का जिक्र किया गया है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ और एमएसपी गारंटी कानून बनवाने के लिए 2020-21 में किसानों ने दिल्ली के बॉर्डर पर 378 दिनों तक एतिहासिक आंदोलन लड़ा था। उस समय केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों वापस ले लिए थे। इसके अलावा सरकार ने एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए एक कमेटी के गठन का एलान किया था। किसान संगठनों ने कई कार्यक्रमों के जरिए केंद्र सरकार को एमएसपी के गारंटी कानून बनाने की मांग की है। लेकिन सरकार ने किसानों की मांग पर कोई कदम नहीं उठाया। मांगे नहीं पूरी होने पर दिल्ली समेत देशभर में कई जगह प्रदर्शन भी किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
किसान संगठनों का कहना है कि विपक्ष के कई दलों ने लोकसभा चुनाव के दौरान किसान और मजदूरों के हितों से जुड़े कई मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। अब किसान संगठन ऐसे दलों के नेताओं से मुलाकात कर उन्हें उनके वादे याद दिला रहे हैं। हम सभी गैर भाजपाई सांसदों से अनुरोध कर रहे हैं कि आप को जनता ने चुन कर अपने प्रतिनिधि के तौर पर संसद में भेजा है, इसलिए आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप एमएसपी गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट एवं किसान-मजदूरों की कर्जमाफी समेत तमाम मुद्दों पर संसद के मॉनसून सत्र में प्राइवेट बिल पेश करें, ताकि किसानों एवं मजदूरों की मांगें पूरी हो सकें। यदि आप संसद में किसानों-मजदूरों के मुद्दों पर प्राइवेट मेंबर बिल नहीं लाते हैं, तो फिर हमें ये मानने पर मजबूर होना पड़ेगा कि किसानों-मजदूरों के मुद्दों पर आप गंभीर नहीं हैं।
कांग्रेस का भी करेंगे विरोध
किसानों नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार से जो हम मांग कर रहे है, वह सभी मांगें जायज हैं। हमने कांग्रेस पार्टी के नेताओं से हमारी मांगें संसद में उठाने की मांग की है। अभी हरियाणा में माहौल कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा है। अगर कांग्रेस ने हमारी मांगें नहीं मानी, तो हम उसके खिलाफ भी मोर्चा खोलेंगे। आगामी विधानसभा चुनावों तक केंद्र सरकार ने हमारी मांगें मान लीं तो ठीक, वरना लोकसभा चुनावों की तरह ही भाजपा का विरोध होगा। हरियाणा में सितंबर माह में किसान महारैली का आयोजन करने जा रहे हैं।