खाद्य मंत्री गोयल, केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय किसान नेताओं से चार दौर की बातचीत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा किसानों का समर्थन करेगी और उनके साथ खड़ी है।
'मोदी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध'
गोयल ने कहा, "कुछ लोग दुष्प्रचार करके गुमराह कर रहे हैं। यह सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने कहा, "हम हर किसान के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।" मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने कृषि मंत्री और गृह राज्य मंत्री के साथ किसान नेताओं को सुझाव दिया था कि सरकार किसान समुदाय के बेहतर भविष्य के लिए और देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करने के लिए उनके साथ कैसे काम कर सकती है।
'हम किसानों से जुड़े हुए थे और आगे भी जुड़े रहेंगे'
मंत्री ने एक इंटरव्यू में कहा, "मुझे भरोसा है कि वे कारणों को देखेंगे और इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले लेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या आंदोलनकारी किसानों के साथ नए दौर की बातचीत का कार्यक्रम है। उन्होंने किसी के साथ भी बातचीत एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।" उन्होंने कहा, "आंदोलन से पहले भी हम किसान नेताओं के साथ नियमित रूप से जुड़े हुए थे और भविष्य में भी हम उनके साथ जुड़ना जारी रखेंगे।"
13 फरवरी को शुरू हुआ किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च
चौथे दौर की बातचीत में तीन केंद्रीय मंत्रियों के समूह ने सरकारी एजेंसियों द्वारा दलहन, मक्का और कपास की फसलों को एमएसपी पर खरीदने की पेशकश की थी। हालांकि, किसान नेताओं ने केंद्र के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह किसानों के हित में नही है। पंजाब के किसानों ने 13 फरवरी को 'दिल्ली चलो' मार्च शुरू किया था। लेकिन शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। कई प्रदर्शनकारी किसान तबसे पंजाब-हरियाणा की सीमा पर डेरा डाले हुए हैं।