कहां तो विपक्ष खुश थी कि चुनाव में किसान आंदोलन को बड़ा मुद्दा बनाकर अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जाएगी, लेकिन शुक्रवार की सुबह जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने की घोषणा की विपक्षी कैंप में मायूसी फैल गई।
हालांकि पीएम के फैसले के बाद ताबड़तोड़ विपक्ष की प्रतिक्रिया आने लगी लेकिन जब सुबह पीएमओ का ट्वीट आया कि प्रधानमंत्री मोदी सुबह नौ बजे देश को संबोधित करेंगे तो किसी को अंदाजा नहीं था वे एक बहुत बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेलने जा रहे हैं जो विपक्ष को निशस्त्र कर देगा। राजनीति के जानकार कहते हैं पीएम की कुछ मिनट के संबोधन ने एक साल से सरकार को घेरने के लिए बनी और बनाई जा रही विपक्ष की रणनीति के चक्रव्यूह को एक झटके में तोड़ दिया। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस की सारे सियासी समीकरण इस एक फैसले से बिगड़ गए हैं।
कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले एक साल से कई किसान संगठन दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। इन कानूनों को लेकर सरकार पिछले एक साल से विपक्ष के निशाने पर थी। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में आंदोलनकारी किसान संगठनों ने खुलेआम भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया। कृषि कानूनों का सबसे बड़ा विरोध पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में हो रहा था। किसानों में आक्रोश इस बात को लेकर था और कई गांवों में भाजपा नेताओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। कई केंद्रीय मंत्रियों को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा था। कृषि कानूनों का विरोध करने के नाम पर कुछ अराजक तत्वों ने भाजपा नेताओं की पिटाई की घटनाओं को भी अंजाम दिया।