सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि तीन अगस्त को फरीदाबाद के जिन भूमि मालिकों को राहत प्रदान की गई थी, उनकी राहत 20 अगस्त तक बनी रहेगी। कथित तौर पर जमीन वन क्षेत्र में होने के कारण इन सभी को नगर निगम की ओर से नोटिस मिला है। हालांकि इन भूमि मालिकों का दावा है कि उनकी जमीन वन क्षेत्र में नहीं है। इन जमीनों पर शादी व अन्य समारोहों का आयोजन होता है।
दरअसल फरीदाबाद नगर निगम ने जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई टालने के आवेदन दिया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि पिछली सुनवाई पर अदालत ने इन याचिकाकर्ता के प्रतिवेदनों पर विचार करने के लिए कहा था। मेहता ने बताया कि उनके प्रतिवेदनों पर विचार किया जा रहा है। यह जांच की जा रही है कि इन सभी की जमीन वन क्षेत्र में है या नहीं? मेहता ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई 20 दिनों के बाद की जाए।
जिसके बाद एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयंत भूषण ने पीठ से कहा कि उन्हें शुक्रवार तक लिए ढहाने की कार्रवाई से राहत दी गई थी। ऐसे में निगम से कहा जाना चाहिए कि ढहाने की कार्रवाई अगले आदेश तक न की जाए। जवाब में पीठ ने भूषण से कहा कि समय निगम ने मांगा है। सॉलिसिटर जनरल यहां मौजूद हैं, ऐसे में आप की चिंता बेकार है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे देंगे।
पीठ ने कहा कि गत तीन अगस्त जिनको अंतरिम राहत दी गई थी, उनकी राहत अगली सुनवाई तक जारी रहेगी। पीठ ने शुक्रवार को पीठ ने एक बार फिर से स्पष्ट किया कि वनक्षेत्र से तमाम अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। पीठ अब इस मामले पर 20 अगस्त को सुनवाई करेगी।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को फरीदाबाद नगर निगम को खोरी गांव के वन क्षेत्र में स्थित करीब 10 हजार घरों को छह हफ्ते के भीतर ढहाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हर हालत में वन क्षेत्र खाली होना चाहिए और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। जिसके बाद कुछ लोगों द्वारा यह दावा किया गया है कि उनकी जमीन वन क्षेत्र में नहीं है, लेकिन निगम की ओर से उन्हें नोटिस मिला है।