दक्षिण-पश्चिम मानसून की दिल्ली समेत आठ राज्यों से बुधवार को विदाई हो गई। खास बात यह रही कि इस बार मेघ जमकर बरसे। मौसम विभाग के मुताबिक इस सीजन में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। दिल्ली में सामान्य 640.3 मिमी की तुलना में 1029.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
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अमूमन उत्तर पश्चिम भारत से मानसून की वापसी 17 सितंबर से होने लगती है। इसके एक सप्ताह बाद मानसून दिल्ली से विदा होने लगता है। मगर इस बार दिल्ली से मानसून की देरी से वापसी हुई है। मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि दक्षिण पश्चिम मानसून जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा दिल्ली और राजस्थान से वापस चला गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्से और पश्चिमी राजस्थान के कुछ और हिस्से से भी मानसून विदा हो गया। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि अगस्त और सितंबर में गहरे कम दबाव के क्षेत्र बनने के कारण मानसून सत्र में देश में लगभग आठ फीसदी अधिक बारिश हुई है। आधिकारिक तौर पर दक्षिण पश्चिम मानसून सत्र का समापन सोमवार को हो गया। चार महीने के इस मानसून सत्र में 934.8 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 868.6 मिमी से अधिक है। 2020 के बाद पहली बार सामान्य से अधिक मानसूनी बारिश हुई है।
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हिमाचल से भी मानसून की हुई वापसी
दक्षिण-पश्चिम मानसून हिमाचल प्रदेश से भी विदा हो गया है। इस साल प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान 600.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जोकि पिछले 124 सालों में 97वीं सबसे अधिक बारिश है। हालांकि, 1901 से 2024 तक की अवधि के लिए सबसे अधिक बारिश (1314.6 मिमी) वर्ष 1922 में दर्ज की गई थी। 27 जून को हिमाचल प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था। 27 जून से 30 सितंबर तक प्रदेश में 600 मिलीमीटर बादल बरसे। प्रदेश से दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी की सामान्य तिथि 25 सितंबर है। बीते साल मानसून 6 अक्तूबर को विदा हुआ था।