व्हाट्सएप पर फेक न्यूज (सांकेतिक तस्वीर)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज का प्रसार दुनियाभर में चिंता का विषय रहा है। इस दिशा में व्हाट्सएप पर गलत जानकारी से भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने को लेकर एक अध्ययन होने जा रहा है। यूके स्थित भारतीय शोधकर्ता सयान बनर्जी के मुताबिक कई रिपोर्टें इशारा करती हैं कि फेक न्यूज का इस्तेमाल किसी राजनेता, उम्मीदवार और खास वर्ग के बारे में गलत धारणा बनाने के लिए किया जाता है। साथ ही मतदाताओं की पसंद को भी बदलने की कोशिश की जाती है।
बनर्जी समेत यूनिवर्सिटी ऑफ एसे्क्स, यूके की टीम समझना चाहती है कि भारत में व्हाट्सएप पर प्रसारित फेक न्यूज राजनीति, नस्लीय हिंसा और लोगों की पसंद को कैसे प्रभावित करती है। शोधकर्ता टीम उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के 18 चुनावी क्षेत्रों में पांच दिन तक शोध करेगी।
यह प्रयोग दो चरणों में होगा। पहले चरण में 18 क्षेत्रों के 3500 मतदाताओं को शामिल किया गया है। वहीं दूसरे चरण में शोधकर्ता एक व्हाट्सएप (कंट्रोल) ग्रुप में सत्यापित खबरें भेजेंगे तो दूसरे (ट्रीटमेंट) ग्रुप में सार्वजनिक वस्तुओं और सुरक्षा मसलों पर फेक न्यूज साझा करेंगे।
फेसबुक द्वारा समर्थित इस अध्ययन में समझने की कोशिश की जाएगी कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों में संदेशों के जरिए यूजर्स का मत कैसे बदलता है। बनर्जी ने बताया कि फेक न्यूज नई बात नहीं है। बरसों से इसका इस्तेमाल सरकारें जनमत को नियंत्रित करने के लिए करती आई हैं। स्मार्टफोन और इंटरनेट के आने से फेक न्यूज पर निगरानी कठिन हो गई है। इस अध्ययन से एकत्र डाटा न सिर्फ शिक्षाविदों के लिए बल्कि राजनीतिक दलों के लिए भी मददगार होगा।