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सदन में सुशील मोदी की मांग: FB और गूगल को विज्ञापनों से होने वाले लाभ का उचित हिस्सा भारतीय मीडिया को मिले

Fri, 10 Feb 2023 04:32 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी(Sushil Modi) ने शुक्रवार को भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि फेसबुक, गूगल और यूट्यूब जैसी बड़ी तकनीकों को विज्ञापन राजस्व को उचित तरीके से साझा करना चाहिए।
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राज्यसभा में सुशील मोदी - फोटो : Social Media
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुशील कुमार मोदी (Sushil Modi) ने राज्यसभा में भारतीय मीडिया संस्थानों के हक में आवाज उठाते हुए कहा कि भारत में भी ऐसा कानून बनाया जाए ताकि फेसबुक और गूगल जैसी दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों को विज्ञापन से मिलने वाले राजस्व का उचित हिस्सा यहां की मीडिया को मिल सके। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए सुशील मोदी ने कहा कि भारतीय प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया संकट के दौर से गुजर रहा है क्योंकि विषय वस्तु तैयार करने के लिए संसाधनों पर वह करोड़ों रुपये खर्च करते हैं।

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फेसबुक और गूगल कमाई का 75 फीसदी हिस्सा अपने पास रखते हैं
सुशील मोदी ने कहा कि भारतीय मीडिया की आय का सबसे बड़ा स्रोत विज्ञापन है लेकिन विज्ञापनों का 75 से अधिक हिस्सा बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों फेसबुक और गूगल के हिस्से में जा रहा है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने कानून बनाकर पारंपरिक मीडिया के हितों को सुरक्षित किया है।

इंटरनेट के बाजार में बड़े समूहों का दबदबा एक चुनौती: राजीव चंद्रशेखर
इससे पहले जनवरी में 'फ्यूचर ऑफ डिजिटल मीडिया' विषय पर हुए सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी इंटरनेट के बाजार में बड़े समूहों के दबदबा होने को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि 2014 में हम सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर ही ज्यादा निर्भर थे, अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा व्यापक हो चुका है। 2014 से पहले हम जिसे डिजिटल अर्थव्यवस्था मानते थे, आने वाले वर्षों में वह वैसी नहीं रहेगी। पिछले एक दशक में इंटरनेट के बाजार में पहले से ज्यादा खुलापन है। अब इंटरनेट बाजार में बड़े समूहों के दबदबे की चुनौती है। सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं हैं। इंटरनेट के करोड़ों उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेही किसकी होगी, यह भी बड़ा सवाल है। इंटरनेट पर पक्षपातपूर्ण और गलत खबरें सही और सटीक समाचारों की तुलना में बहुत तेजी से फैलती है। यह न सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी एक चुनौती है। 

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