सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मध्य प्रदेश में सात साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के एक दोषी की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोषी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के लिए निचली अदालत द्वारा उसे और एक अन्य दोषी को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को दी गई मौत की सजा पर रोक लगाई जाती है। इसकी सूचना तुरंत संबंधित जेल को भेजी जाए।
शीर्ष अदालत ने राज्य को 1 मार्च, 2022 तक दोषी से संबंधित प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट और जेल में दोषी द्वारा किए गए कार्यों के बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि दोषी की मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त की जानी चाहिए। इसके लिए इंदौर के एक अस्पताल के निदेशक को उसके मनोरोग मूल्यांकन के लिए एक टीम गठित करने को कहा गया और रिपोर्ट 1 मार्च तक पेश करने का निर्देश दिया गया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जेल अधिकारी दोषियों तक पहुंच और उचित मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों की टीम के साथ सहयोग करेंगे। पीठ ने अपने 15 दिसंबर के आदेश में कहा कि सीजेआई से आवश्यक निर्देश मांगने के बाद 22 मार्च, 2022 को उपयुक्त अदालत के समक्ष अंतिम निपटान के लिए सूची रखी जाएगी। उच्च न्यायालय ने इस साल सितंबर में दिए अपने फैसले में निचली अदालत द्वारा अगस्त 2018 में मामले में दो दोषियों को दी गई मौत की सजा की पुष्टि की थी।