मामले की जांच कैसे होगी?
डीआईजी नवीन सिंगला के मुताबिक, मामले की तकनीकी जांच की जाएगी। इसमें फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज की जांच और फोन डेटा का विश्लेषण शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी बनाई जाएगी। पुलिस को छात्रा का बयान भी मिला है और उसी के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, छात्रा यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रह रही थी और कथित घटना के बाद अपने घर चली गई थी।
छात्रों की क्या मांग है?
मामले की जांच के अलावा छात्रों की हॉस्टल से जुड़ी दूसरी मांगें भी थीं। छात्राओं की प्रमुख मांग थी कि गर्ल्स हॉस्टल में पूरा स्टाफ महिला होना चाहिए। छात्रों की अन्य मांगों को लेकर भी यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ बातचीत होनी थी।
पुलिस के मुताबिक, छात्र प्रतिनिधियों और एलपीयू प्रबंधन के बीच दोपहर 12 बजे बैठक तय की गई थी। पुलिस ने छात्र नेताओं से इस बैठक को लेकर बात भी की थी। एक छात्र ने कहा कि प्रदर्शनकारी जवाबदेही और पारदर्शी जानकारी चाहते हैं।
प्रदर्शन हिंसक कैसे हुआ?
एलपीयू में शुरू हुआ प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया। छात्रों ने कैंपस की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर दिया। प्रदर्शन के दौरान वाहनों में आग लगाए जाने की घटना भी सामने आई। अब सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रही हैं जिनमें कुछ लोग यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित मॉल में तोड़फोड़ और लूट करते नजर आ रहे हैं। इन वीडियो ने इस पूरे प्रदर्शन पर सवाल भी खड़ा किया है।
इन वीडियो में उपद्रवी मॉल की दुकानों से खाना, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम और अन्य सामान बिना पैसे दिए उठाते और खाते नजर आ रहे हैं। वहीं एटीएम कियोस्क, दुकानों के शीशे और यूनिवर्सिटी हॉल को भी तोड़ा गया है।
पुलिस के मुताबिक, इस दौरान पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। रविवार देर रात पुलिस के लाठीचार्ज के बाद हालात तेजी से बिगड़े।
बाहरी लोगों को लेकर क्या कहा गया?
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने दावा किया कि कुछ बाहरी लोग भी यूनिवर्सिटी पहुंचे थे। एक छात्र ने कहा कि जब तक केवल यूनिवर्सिटी के छात्र मौजूद थे, तब तक स्थिति अलग थी। उसके मुताबिक, बाद में आए बाहरी लोगों ने तोड़फोड़ की।
एलपीयू के डीन सौरभ लखनपाल ने भी प्रदर्शन के दौरान बाहरी असामाजिक तत्वों के शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि बाहरी लोगों ने यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ के लिए बाहरी लोग जिम्मेदार थे।
एलपीयू प्रशासन ने मामले पर क्या कहा?
एलपीयू के डीन सौरभ लखनपाल ने कहा कि जब छात्रों ने मामला यूनिवर्सिटी के सामने रखा तो प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि छात्रों को सीसीटीवी फुटेज देखने और उस कमरे में जाने की अनुमति दी गई, जिसकी पहचान छात्रों ने की थी। यूनिवर्सिटी ने छात्रों से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए भी कहा था।
बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि पूरा मामला अफवाहों से जुड़ा हुआ है। एलपीयू की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को गलत, निराधार और मनगढ़ंत बताया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व इन दावों को फैला रहे थे।
कमरा नंबर 504 को लेकर क्या कहा गया?
एलपीयू ने कमरा नंबर 504 में रहने वाली तीन छात्राओं का वीडियो बयान भी जारी किया। इन छात्राओं ने कहा कि उनके कमरे में कोई दुष्कर्म नहीं हुआ और वे पिछले दो महीने से वहां रह रही हैं। यूनिवर्सिटी ने इस वीडियो बयान के जरिए सोशल मीडिया पर चल रही कथित दुष्कर्म की खबरों को गलत बताया।
एलपीयू ने कक्षाएं और परीक्षाएं स्थगित कीं
एलपीयू ने 28 सितंबर से नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दीं। यूनिवर्सिटी ने मिड-टर्म परीक्षाओं को भी अगली सूचना तक टाल दिया। परीक्षा का नया शेड्यूल बाद में यूएमएस के जरिए जारी करने की बात कही गई। यूनिवर्सिटी ने छात्रों को माता-पिता या अभिभावकों से सलाह लेकर इन 10 दिनों के दौरान अपने घर जाने की अनुमति दी।
जो छात्र कैंपस में रहेंगे, उन्हें अपने हॉस्टल या रहने की जगह के अंदर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई। छात्रों से किसी भी तरह की अशांति में शामिल नहीं होने को भी कहा गया। कक्षाएं स्थगित होने के बाद छात्र कैंपस छोड़कर अपने घरों की ओर जाने लगे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने क्या निर्देश दिए?
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एलपीयू मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने डीजीपी गौरव यादव को यूनिवर्सिटी पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने को कहा।
चितकारा यूनिवर्सिटी का मामला
- फोटो : अमर उजाला
चितकारा यूनिवर्सिटी में क्या हुआ?
एलपीयू से पहले पंजाब की पटियाला जिले के राजपुरा में स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में भी छात्रों का प्रदर्शन हुआ था। चितकारा यूनिवर्सिटी के बनूर कैंपस में 25 सितंबर की रात छात्रों के बीच दो छात्राओं के लापता होने की खबरें फैलने लगीं।
सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट संदेशों में दावा किया गया कि दो छात्राएं गर्ल्स हॉस्टल से लापता हैं या उन्होंने आत्महत्या कर ली है। इसके अलावा हॉस्टल से चीखें आने और पहले हुई एक मौत से जुड़े कथित भूत की बात भी छात्रों के बीच फैल रही थी।
ये दावे छात्र सोशल मीडिया समूहों में तेजी से फैलने लगे। इसके बाद सैकड़ों छात्र देर रात कैंपस में जमा हुए। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाब मांगा और सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की।
चितकारा में प्रदर्शन कैसे हिंसक हुआ?
छात्रों का प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया। कैंपस की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। दो पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की गई। आरोप है कि कुछ छात्रों ने पुलिस टीम पर पथराव किया। केएसएम चौकी इंचार्ज अजय कुमार के साथ भी मारपीट की सूचना है। कुछ छात्रों ने उन पर शराब के नशे में होने का आरोप लगाया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी की लैब में उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लिया।
पुलिस ने छात्राओं के लापता होने के दावे पर क्या कहा?
बनूर के डीएसपी सुखदेव सिंह ने बताया कि पुलिस को छात्रों की ओर से दो छात्राओं के लापता होने की चिंता के बारे में जानकारी मिली थी। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी इन दावों को देखा था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है, लेकिन उस समय यह जानकारी नहीं थी कि कौन-सी छात्राएं लापता हैं या उनके नाम क्या हैं।
पुलिस ने मामले की जांच और सत्यापन शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की ओर से दो छात्राओं के लापता होने की पुष्टि करने वाली कोई ठोस जानकारी अभी तक नहीं दी गई थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में क्या हुआ?
22 सितंबर को लेडी श्रीराम कॉलेज के पिछले गेट से करीब 50 मीटर दूर पुलिस ने कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को पकड़ने की कोशिश की। आरोपी ने गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी।
इस घटना के बाद लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं में पिछले गेट और आसपास के इलाके की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। छात्राओं ने आरोप लगाया कि बैक गेट के आसपास पर्याप्त पुलिस निगरानी नहीं है। उन्होंने वहां स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कैमरों जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही। छात्राओं के मुताबिक, इस इलाके में अक्सर छेड़छाड़ की घटनाओं की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
घटना के बाद कॉलेज ने 22 सितंबर की दोपहर से कक्षाएं स्थगित कर दीं। 23 सितंबर को ऑनलाइन कक्षाएं कराई गईं, जबकि 24 सितंबर से ऑफलाइन कक्षाएं दोबारा शुरू कर दी गईं।
छात्रों ने क्यों किया प्रदर्शन?
इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों के छात्राओं ने महिला सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, मिरांडा हाउस और कमला नेहरू कॉलेज के छात्र शामिल हुए।
प्रदर्शन में छात्रों ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग की। उन्होंने दक्षिण दिल्ली में स्ट्रीट लाइट, पुलिस पेट्रोलिंग और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
प्रदर्शन में करीब 200 छात्र शामिल हुए। मार्च कमला नेहरू कॉलेज से शुरू होकर गार्गी कॉलेज की ओर गया। प्रदर्शन के बाद सिरी फोर्ट रोड पर बैठक हुई, जहां महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर मांगपत्र तैयार करने पर चर्चा की गई।
छात्राओं ने 'हम औरतें आजाद हैं' मार्च भी निकाला। इसमें उन्होंने हॉस्टल और पीजी के कड़े नियमों और अंधेरा होने के बाद पार्कों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक जैसी 'सुरक्षात्मक पाबंदियों' की आलोचना की।
साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय ने मुखर्जी नगर में दो छात्राओं से कथित पीछा करने और उत्पीड़न के मामले में तीन एलएलबी छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विश्वविद्यालय ने तीनों के परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। पुलिस ने इस मामले में 23 सितंबर को एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें पीछा करने और महिला का अपमान करने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।