पूर्णिया में रैली के दौरान अमित शाह
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अमित शाह का बिहार दौरे का क्या कार्यक्रम है?
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की आज 120वीं जयंती है। इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह पहले वाराणसी पहुंचेंगे। यहां से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ जेपी के गांव सिताब दियारा, सारण जाएंगे। यहां जेपी की प्रतिमा का अनावरण करने के साथ ही एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
इससे पहले आज सुबह गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, "सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें नमन। लोकतंत्र को समाप्त करने के लिए लगाए गए आपातकाल के खिलाफ अनेक यातनाएं सहते हुए भी उन्होंने संपूर्ण क्रांति का जो बिगुल फूंका, वो सभी देशवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना रहेगा।" 20 दिन के भीतर अमित शाह के ये दूसरा बिहार दौरा है। इससे पहले गृह मंत्री 23-24 सितंबर को सीमांचल के पूर्णिया और किशनगंज जिलों के दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करने के साथ ही कई अन्य पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था।
पूर्णिया में रैली के दौरान अमित शाह
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इन दौरों पर भाजपा का क्या कहना है?
भाजपा कह रही है कि अमित शाह के दौरे से विपक्ष घबराया हुआ है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने दावा किया कि नीतीश कुमार इस दौरे से डरे हुए हैं। इसी वजह से उन्होंने नगालैंड भागने का फैसला किया। संजय जायसवाल ने आठ अक्टूबर को पहली बार जेपी की पुण्यतिथि मनाने के लिए भी नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश ने कभी जेपी की पुण्यतिथि नहीं मनाई। लेकिन, बीते 8 अक्टूबर को जेपी की पुण्यतिथि मनाने के लिए सिताब दियारा गए। 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार नीतीश ने जेपी की पुण्यतिथि मनाई।
मेरठ पहुंचे केसी त्यागी।
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विपक्ष अमित शाह के दौरे पर क्या दावा कर रहा है?
अमित शाह के दौरे को लेकर विपक्ष भाजपा का हमलावर है। जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा कहते हैं कि बिहार में भाजपा की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है। इसी वजह से अमित शाह लगातार बिहार आ रहे हैं। इन दौरों से भी भाजपा जमीन पर मजबूत नहीं होगी। जदयू महासचिव केसी त्यागी कहते हैं कि जेपी समाजिक एकता, सहिष्णुता और जाति रहित समाज के प्रतीक हैं। भाजपा को जवाब देना होगा कि क्या वह जेपी के विचारों पर चल रही है। या फिर, सिताब दियारा का दौरा केवल एक फोटो अपर्चुनिटी से ज्यादा कुछ नहीं है।
नीतीश के नगालैंड दौरे को लेकर त्यागी कहते हैं कि नीतीश कुमार जेपी की जयंती पर नगालैंड जा रहे हैं। जेपी ही वो शख्स थे जिन्होंने नगालैंड में शांति के लिए काम किया था। वह भाजपा से सवाल पूछते हैं कि क्या भाजपा ने नगालैंड में शांति हासिल करने की कोशिश की है?
इन दौरों के क्या सियासी मायने निकाले जा रहे हैं?
जदयू के एनडीए से अलग होने के बाद अमित शाह का पहला दौरा 23-24 सितंबर को सीमांचल में हुआ था। सीमांचल बिहार का वो इलाका है जहां मुस्लिम आबादी की बहुलता है। नेपाल-पश्चिम बंगाल और झारखंड से सटे इस इलाके में मुस्लिम आबादी करीब 46 फीसदी है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भाजपा को इस इलाके में पटखनी मिलती रही है। अमित शाह इस दौरे से अपने कमजोर पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुस्लिम बहुल इलाके में जदयू और राजद की पकड़ रही है। दोनों के साथ आने के बाद इस इलाके में महागठबंधन को फायदा मिलने की उम्मीद है।
नीतीश और लालू दोनों ने बिहार आंदोलन से राजनीति में प्रवेश किया, जिसे 1974 में जेपी आंदोलन के रूप में भी जाना जाता है। ये दोनों ही नेता 1990 के दशक से ही बिहार की राजनीति के धुरी रहे हैं। सीमांचल के बाद अमित शाह का जेपी के गांव का दौरा महागबंधन के लिए नई चुनौती माना जा रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि शाह इस कदम से बिहार के दो समाजवादी नेताओं लालू यादव और नीतीश कुमार को चुनौती पेश करने की तैयारी में हैं।
इससे पहले कौन से बड़े भाजपा नेता जेपी के गांव आ चुके हैं?
अमित शाह के इस दौरे से पहले 2011 में कोई भाजपा नेता जेपी के गांव पहुंचा था। तब उस वक्त के भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने जेपी के गांव से चेतना यात्रा निकाली थी। उस वक्त तक जेपी के गांव तक बिजली भी नहीं पहुंची थी।