क्या है चर्चा?
कूटनीति और विदेश नीति के जानकारों के बीच में चर्चा है कि मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की पहल और आईएसआई के प्रयास से छोड़ा गया था। बताते हैं इस समय बरादर को पाकिस्तान आगे बढ़ा रहा है। जबकि तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबैतुल्ला अखुंदजादा आईएसआई की निगहबानी में है। ताकि पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर प्रभाव बना रहे। इस अभियान में पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क की मदद ली है और तालिबान के अधिकांश गुट मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के साथ हैं। इस तरह से यह हिबैतुल्ला अखुदजादा को कमजोर करने की कोशिश है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि आखिर जब अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो चुका है तो हिबैतुल्लाह अखुंदजादा क्यों सामने नहीं आ रहा है? अफगानिस्तान के मामले मे नजर बनाए रखने वाले एके शर्मा का कहना है कि अखुंदजादा मुल्ला गनी बरादर से भी ज्यादा कट्टर है। वह धार्मिक मामलों का प्रमुख भी है।
अफगानिस्तान शांति और स्थात्वि के लिए कई देश कर रहे हैं प्रयास
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार अफगानिस्तान में शांति वार्ता की स्थापना के लिए सक्रिय हैं। इसी स्तर की सक्रियता एनएसए अजीत डोभाल भी बनाए हुए हैं। भारत अफगानिस्तान में अपने हितों को देखते हुए कतर समेत दुनिया के तमाम देशों के संपर्क है। फिलहाल भारत का फोकस अभी अपने नागरिकों की सुरक्षित निकासी पर है। इसी तरह से अमेरिका के टारगेट में 31 अगस्त तक अपने सैनिकों की वापसी है। रूस, चीन, ईरान समेत अफगानिस्तान के तमाम पड़ोदी देश भी इसी दिशा में सक्रिय हैं। ऐसे में विश्व के नेताओं के बरादर से भेंट मुलाकात के प्रयास को अफगानिस्तान के हित में ही माना जा रहा है। अरब देशों ने भी अफगानिस्तान को लेकर अपना उद्देश्य साफ कर दिया है।