पीएमओ का जो काम है वह करे
दिनेश दुआ कहते हैं कि पीएमओ, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग का जो काम है, उसे वही करना चाहिए। यहां तो जो काम पीएमओ का नहीं है, उसे वह पूरा करने में जुटा है। अफसोस की बात है कि केन्द्र सरकार ने वैक्सीन वितरण के मामले में पारदर्शी विकेन्द्रीकरण को नहीं अपनाया। इसे अपने हाथ में ले लिया। जबकि यह राज्यों की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। इसी तरह से वैक्सीनेशन प्रक्रिया भी पटरी से उतरती चली गई। इसके समानांतर जहां किसी केन्द्रीय एजेंसी को वैक्सीन का ग्लोबल टेंडर या इसके आयात की जिम्मेदारी लेकर निर्णय लेना चाहिए, वहां राज्यों को इस जिम्मेदारी को निभाने की जिम्मेदारी दे दी गई है।
ब्रिटेन, अमेरिका समेत देशों ने इसी तरह की पद्धति अपनाई। वैक्सीनेशन का मामला लॉजिस्टिक (सप्लाई चेन) का इश्यू है। यह पीएमओ और नीति आयोग को नहीं पता। इन्हें नहीं पता कि कैसे वैक्सीन प्रोक्योर की जाती है, कैसे स्टोर और इसकी सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक का रोडमैप बनाया जाता है। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन का कहना है कि इससे बाद में अव्यवस्था बढऩी तय है। वैक्सीन की कीमत आदि को लेकर भी राजनीति और कुत्ता-बिल्ली के बीच युद्ध जैसी नौबत आ सकती है।
नंदन नीलेकणी को दे देते जिम्मेदारी
फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के प्रमुख का कहना है कि वैक्सीन प्रोक्योरमेंट, स्टोर, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक की जिम्मेदारी नंदन नीलेकणी जैसे विशेषज्ञ को देनी चाहिए थी। दुआ का कहना है कि जिस तरह से आधार कार्ड को उन्होंने लागू कराने का रोडमैप बनाया, पूरी दुनिया में उसका लोहा माना जाता है। इसके आगे भारत का कोविड वैक्सीनेशन प्रॉसेस तो बहुत छोटी चीज है। यहां तो समस्या यह है कि कोई रिस्क लेने वाला, निर्णय लेने वाला नहीं है।
छह महीने नींद में सोती रही सरकार
दिनेश दुआ कहते हैं कि वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा माल अमेरिका से आता है। इसका कुछ कच्चा माल केवल अमेरिका की कंपनी बनाती है। अमेरिका ने कच्चे माल पर बैन लगा दिया। छह महीने तक हम चुप बैठे रहे। हमें उसी समय अपनी आवश्यकता को देखकर कच्चा माल स्टोर कर लेना था या फिर अनुमति लेने की पहल करनी थी। जब वैक्सीन का संकट बढ़ने की नौबत आई तब प्रधानमंत्री ने बाइडन से बात की और कच्चे माल से प्रतिबंध हट सका। दुआ का कहना है कि आईसीएमआई और केन्द्र सरकार के कुछ विशेषज्ञों को पता है कि कच्चा माल केवल अमेरिका से आ सकता है। लेकिन इसके बाद भी हम चुप रहे। कोविड की पहली लहर आने के बाद से दूसरी लहर आने और चरम तक पहुंचने के दौरान तक हमने बड़ी लापरवाहियां कीं।
भारत में छह कंपनियां बना सकती हैं वैक्सीन
फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन का कहना है कि केन्द्र सरकार को तत्काल पहल करके भारत बायोटेक से बात करनी चाहिए। भारत बायोटेक वैक्सीन को उसकी वैक्सीन के फॉर्मूले की सुरक्षा की गारंटी देते हुए इसे देश की वैक्सीन निर्माता कंपनियों को बनाने का लाइसेंस देना चाहिए। दिनेश दुआ का कहना है कि हमें अभी कम से कम 200 करोड़ डोज की आवश्यकता है। इतनी बड़ी मात्रा में डोज मिलना आसान नहीं है। वैक्सीन का निर्माण कटिंग एज ऑफ टेक्नोलॉजी का मामला है। देश में जाइडस-कैडिला, पिनाशिया बायोटेक, ओखर्ड, बायोलाजिकल एवांस के पास वैक्सीन बनाने की क्षमता है। केन्द्र सरकार को चाहिए कि दखल दे, तकनीक दिलवाए और वैक्सीन निर्माण का रास्ता साफ कराए।