प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ. बिबेक देबरॉय।
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इस वर्ष के केंद्रीय बजट को तारीफ मिलनी लाजमी है। आखिर, यह अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शा रहा है। बजट में जिंदगी को बेहतर बनाने, कारोबार में आसानी, न्यायिक प्रशासन और भरोसेमंद शासन को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उन पर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं गया है। ऐसी महत्वपूर्ण घोषणाओं पर नजर डालते हैं...
बजट की प्रमुख घोषणाओं में से एक है, सरकार और सरकारी उपक्रमों के बीच संविदात्मक विवादों के लिए एक स्वैच्छिक समाधान योजना की शुरुआत। इससे विवादों को निपटाने के लिए एक कुशल और प्रभावी समाधान मिलने की उम्मीद है। कारोबार के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए, एक प्रमाण के रूप में पैन का उपयोग होगा। सरकार ने ऐसे गरीबों को आर्थिक मदद देने की भी घोषणाएं की हैं, जो कारागार में हैं और जुर्माने या जमानत की रकम अदा करने में असमर्थ हैं। 2047 तक भारत को विकसित देशों की श्रेणी में लाने की चाह को पूरा करने के लिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि न केवल कारोबार करने में आसानी हो, बल्कि जिंदगी जीना भी आसान हो। इस बजट ने ठीक यही किया है।
सहज-कुशल न्यायिक प्रशासन मुहैया कराने पर जोर
एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा ई-कोर्ट प्रोजेक्ट का तीसरा चरण है, जिसे 7,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य एक सहज और कुशल न्यायिक प्रशासन मुहैया कराना है। प्रक्रियाओं को सरल बनाने को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता 39 हजार से ज्यादा प्रक्रियाओं को हटाए जाने और 3,400 से ज्यादा कानूनी प्रावधानों को गैर-अपराध श्रेणी के तहत लाए जाने में भी परिलक्षित होती है।
बिबेक देबरॉय और आदित्य सिन्हा: देबरॉय प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष और सिन्हा परिषद में अपर निजी सचिव-अनुसंधान हैं।
यह चुनावी बजट प्रतीत हो रहा है: चौधरी रामचेत, पूर्व तकनीकी सलाहकार, यूएन
यह चुनावी बजट प्रतीत हो रहा है। इसमें निर्यात को लेकर सरकार ने कोई रुख साफ नहीं किया है। किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी नहीं करना किसानों के लिए झटका है।
पीएम प्रणाम योजना के तहत पृथ्वी के पुनरुद्धार के प्रति जागरूकता, पोषण और सुधार के लिए रासायनिक उर्वरकों के कम से कम व संतुलित इस्तेमाल के अलावा उनके स्थान पर वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
वहीं, गोबरधन (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो सिसोर्सेज धन) योजना के तहत 10 हजार करोड़ से 500 नए सामुदायिक अवशिष्ट संयंत्र स्थापित होंगे। इनमें से 200 कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट और 300 सामुदायिक प्लांट होंगे। इनमें से 75 प्लांट शहर में स्थापित किए जाएंगे। इससे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों को आर्थिक लाभ पहुंचाकर उनका जीवन और बेहतर बनाया जाएगा।
श्रीअन्न से अन्नदाता को धनश्री बनाने की चाहत: निरंकार सिंह, कृषि विशेषज्ञ
कृषि के लिए कई अहम घोषणा की हैं। ग्रीन ग्रोथ को सरकार की प्राथमिकता बताया गया है। इस क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने और मोटा अनाज को श्रीअन्न का नाम दिया है। उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार का जोर कृषि और किसानों को डिजिटल और हाईटेक बनाने पर ज्यादा है। कृषि फंड की स्थापना की भी घोषणा की गई है, जो अहम हैं।
उत्पादन बढ़ाने पर जोर है, पर निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कोई अहम घोषणा नहीं की गई है। कृषि क्षेत्र और किसान का भला इस क्षेत्र में अधिक मात्रा में निजी निवेश से ही होगा। खेती
में जरूरी विविधीकरण भी निजी निवेश से ही संभव है। विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदलने के लिए खेती-किसानी में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। जाहिर तौर पर यह बदलाव महज ऋण की व्यवस्था करने से नहीं आएगा।
किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना होगा। किसान और कृषि तभी सशक्त होंगे जब इसमें आधुनिकता और विविधता का समागम होगा। भारत के सामने मोटा अनाज उत्पादन में दुनिया की अगुवाई करने का बहुत बड़ा अवसर है। आम बजट में भी सरकार ने इस पर खासजोर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इसके भविष्य में बेहतर नतीजे सामने आएंगे।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए मोटे अनाज की मांग बढ़ी
सरकार ने मोटा अनाज का उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया है। सरकार का इरादा मोटा अनाज मामले में भारत को वैश्विक हब बनाने का है। भारत के लिए यह संभव है और भविष्य में मोटे अनाज की मांग में तेज वृद्धि की संभावना है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए दुनिया में मोटे अनाज की मांग बढ़ी है। इसका उत्पादन लागत भी बेहद कम है। चूंकि इसके उत्पादन के लिए दूसरी फसलों की तुलना में पानी और रासायनिक खाद की बहुत कम जरूरत पड़ती है। ऐसे में किसान कम लागत पर इसके जरिये अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं।