डॉक्टरों के अनुसार मोबाइल डाटा की दरें बढ़ने से हर परिवार महंगे रिचार्ज नहीं कराएगा। स्कूल और कालेज के छात्र इंटरनेट पर पढ़ाई से जुड़ी क्रियाओं के लिए स्मार्ट फोन लेते हैं। ऐसे में इनके माता पिता उतना ही पैकेज लेंगे जितना इनकी पढ़ाई के लिए जरूरी है। वीडियो, गेम, मूवी इत्यादि के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की जरूरत होती है जबकि पढ़ाई के लिए इतनी स्पीड की जरूरत नहीं होती। बच्चों को इस लत से बचाने में यह काफी मदद कर सकता है।
25 फीसदी इंजीनियरिंग छात्रों में मिली लत
एम्स के डॉ. यतन पाल सिंह बलहारा के अनुसार देश के 23 इंजीनियरिंग कालेजों के 3973 छात्रों पर किए अध्ययन के अनुसार 25 फीसदी से ज्यादा छात्र इंटरनेट की लत के शिकार हैं। यह फोन पर इंटरनेट के जरिए सोशल साइट का इस्तेमाल करते हैं। इनमें प्रोब्लमेटिक इंटरनेट यूज (पीआईयू) के गंभीर लक्षण मिले हैं। इस अध्ययन में एम्स के डॉक्टर भी शामिल थे। यह अध्ययन कुछ दिन पहले इंडियन जर्नल ऑफ साइकाइट्री में प्रकाशित हुआ है।
देश के मनोरोग विशेषज्ञों को एम्स दे रहा प्रशिक्षण
डॉ. बलहारा ने बताया कि फोन और इंटरनेट की लत से बच्चों और युवाओं को बचाने के लिए देश भर के मनोरोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना भी जरूरी है ताकि हर शहर में इसका उपचार मिल सके। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर एम्स ने हाल ही में बिहेवियर नाम से वेबसाइट शुरू की है। जहां मनोरोग विशेषज्ञों के लिए ऑनलाइन कोर्स, अभिभावकों के लिए काउंसलिंग के तरीके और उपचार इत्यादि के बारे में बताया जा रहा है।