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मिसाल : शिक्षा और अनुसंधान के साथ 16 भाषाएं बोलते, 20 समझते हैं आईआईटी जोधपुर के छात्र

Fri, 07 Oct 2022 06:29 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

IIT Jodhpur : कैंपस में अंग्रेजी और हिंदी लिखने वालों की संख्या सबसे अधिक 37.9 फीसदी है। तेलुगू 3.8 फीसदी, मराठी 3.6 फीसदी, संस्कृत 2.8 फीसदी, गुजराती 2.8 फीसदी, पंजाबी 1.2 फीसदी, तमिल 1.2 फीसदी हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Freepik
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विस्तार
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IIT Jodhpur : आईआईटी जोधपुर का कैंपस सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक उदाहरण हैं। यहां के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी हाय, हैलो और गुड मार्निंग से बात नहीं करते हैं। वे नमस्कार, प्रणाम, सतश्री अकाल, नोमोश्कार, वणक्कम, खम्मा गनी, केम छो, चिबाई और ताशी देलेक से एक-दूसरे का अभिनंदन करते हैं।

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वर्ष 2008 में स्थापित आईआईटी जोधपुर शिक्षा और अनुसंधान के साथ इन दिनों भाषाई विविधता के चलते चर्चा में है। यहां के छात्र 16 भाषाएं बोलते, 12 भाषाएं लिखते और 20 भाषाएं समझते हैं। यह संस्थान शिक्षा और अनुसंधान में विकास के साथ इकोसिस्टम में भाषाई विविधता की पहचान बढ़ा रहा है।

भाषाई विविधता के चलते ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संदेश
आईआईटी जोधपुर कैंपस भाषाई विविधता के चलते ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संदेश दे रहा है। यहां दूरदराज के इलाकों से आने वाले छात्र एक परिवार की तरह मिलजुलकर रहते हैं। उन्हें कभी घर से दूर रहने की कमी महसूस नहीं होती है। वे भारतीय संस्कृति, परंपराओं को बढ़ावा दे रहे हैं। देश के शीर्ष प्रौद्योगिकी संस्थानों की यही एकता भारत को एक दिन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाएगी। - प्रोफेसर शांतनु चौधरी, निदेशक, आईआईटी जोधपुर
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हिंदी बोलने वाले सबसे अधिक
कैंपस में सबसे अधिक हिंदी बोलने वाले 37.9 फीसदी छात्र हैं। जबकि अंग्रेजी में बात करने वालों का आंकड़ा 36.6 फीसदी है। तीसरे नंबर पर तेलुगू 4.6 फीसदी, मराठी 3.8 फीसदी, गुजराती तीन फीसदी, बंगाली 2.8 फीसदी, पंजाबी 2.1 फीसदी, कन्नड़ 1.5 फीसदी, मैथिली 0.4 फीसदी, उर्दू 1.7 फीसदी, असमिया 0.7 फीसदी, तमिल 1.5  फीसदी हैं।

हिंदी के साथ अंग्रेजी लिखने वाले ज्यादा
अंग्रेजी और हिंदी लिखने वालों की संख्या सबसे अधिक 37.9 फीसदी है। तेलुगू 3.8 फीसदी, मराठी 3.6 फीसदी, संस्कृत 2.8 फीसदी, गुजराती 2.8 फीसदी, पंजाबी 1.2 फीसदी, तमिल 1.2 फीसदी हैं।

हिंदी और संस्कृत से ज्यादा अंग्रेजी भाषा समझते
कैंपस में हिंदी से अधिक अंग्रेजी भाषा को समझने वाले छात्रों, शिक्षकों व कर्मियों की संख्या है। इसमें अंग्रेजी के 32.9 फीसदी, हिंदी के 32.6, गुजराती के 4.8 फीसदी, बंगाली 3.2 फीसदी, तेलुगू 4.1 फीसदी, उर्दू 2.9 फीसदी, सिंधी 0.5 प्रतिशत, संस्कृत 3.7 फीसदी, पंजाबी 4.5, मराठी 4.7 फीसदी, मलयालम 3.7 फीसदी, कोंकणी 2.4प्रतिशत, कन्नड़ 1.4  फीसदी हैं।

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