परीक्षा की तरह ही यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल, इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए भी भारी भरकम तैयारियां कीं, लेकिन सब धरी रह गईं। परीक्षार्थियों को अधिक से अधिक नंबर मिले, इसके लिए मूल्यांकन की नई नीति तैयार की गई थी, लेकिन इस संबंध में परीक्षकों को प्रशिक्षित ही नहीं किया गया है। मूल्यांकन बुधवार से शुरू हो रहा है।
मूल्यांकन में बेहतरी के लिए परीक्षा के दौरान कई कोशिशें की गईं। परीक्षार्थियों को अच्छे अंक मिलें, इसके लिए मूल्यांकन का खाका बनाया गया, लेकिन शासन की तमाम कोशिशों के बाद भी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के 60 लाख परीक्षार्थियों की कापियां ऐसे हाथों में जा रही हैं, जिन्हें नए मूल्यांकन नियमों की कोई जानकारी नहीं है।
सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के कोर्स और परीक्षा प्रणाली में बदलाव के मद्देनजर मूल्यांकन नीति में बदलाव कर उसे ज्यादा सकारात्मक बनाने की कोशिश की, लेकिन इसका लाभ छात्रों को मिलता नहीं दिखता।