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विज्ञान प्रेम के चलते पूर्व सांसद ने पब्लिक के लिए खोल दी 5000 किताबों की लाइब्रेरी

Wed, 31 Aug 2016 12:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : indianexpress
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अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल में सांसद रहे प्रदीप रावत की पसंदीदा जगहों में से एक लाइब्रेरी है। जब वो पुणे से सांसद थे तब संसद लाइब्रेरी उनकी सबसे पसंदीदा जगहों में एक थी। संसद लाइब्रेरी में रावत को विज्ञान की किताबें बहुत पसंद थी और शायद यही वजह है कि आज उनकी खुद की लाइब्रेरी है।
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प्रदीप रावत की 5000 से अधिक किताबों वाली लाइब्रेरी पब्लिक के लिए फ्री है। रावत की लाइब्रेरी लगभग 30,000 छात्रों के लिए दूसरा घर है जहां वो बैठकर शांति से किताबें पढ़ सकते हैं। पिछले साल माहराष्ट्र पीएससी परीक्षा में टॉप करने वाले अतुल रानाडे इस लाइब्रेरी में हर रोज जाते हैं।

अतुल का कहना है कि, "लाइब्रेरी में मौजूद किताबों का संग्रह सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए बेहद उपयोगी है। अध्यात्म से लेकर विज्ञान तक की बहुत ही महत्वपूर्ण किताबें लाइब्रेरी में मौजूद हैं।"  
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अमेरिका व यूरोप की यात्रा से 10 बैग भरकर लाए किताबें

60 वर्षीय प्रदीप रावत विज्ञान की पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन जेपी आन्दोलन के समय उन्हें जेल जाना पड़ा था जिस वजह से उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई लेकिन विज्ञान पढ़ने का जुनून उन्होंने विज्ञान लाइब्रेरी में पूरा किया। जिस किसी अच्छी किताब को वो कहीं किसी लाइब्रेरी में देखते तुरंत ऑनलाइन ऑर्डर कर देते।

इसी तरह आज विज्ञान की बहुत ही महत्वपूर्ण किताबें उनकी लाइब्रेरी में मौजूद हैं। किताबों से प्रेम के चलते रावत ने अमेरिका व यूरोप की यात्रा भी की जहां से आठ से दस बैग किताबें के भरकर लाए।

कार्ल सगन और चार्ल्स डार्विन की पुस्तकों के साथ-साथ मस्तिष्क और व्यवहार, पौधों और जानवरों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, जलवायु विज्ञान, और आत्मकथाएँ सहित कई पुस्तकों को विभिन्न कैटेगरी में रखा गया है।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के वैज्ञानिक देंगे लैक्चर?

- फोटो : Getty
इंडियन एक्प्रेस की खबर के मुताबिक रावत की एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। वो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के वैज्ञानिकों से निरंतर बात कर रहे हैं वो चाहते हैं कि लाइब्रेरी में साप्ताहिक शैक्षिक विचार विमर्श और डिबेट शुरू हो।

आईआईएसईआर में जीव विज्ञान के प्रमुख डॉ एल एस शशिधारा का कहना है कि, "मैंने अब तक जितनी भी पब्लिक लाइब्रेरी का भ्रमण किया है यह उनमें सबसे बेहतर है।" डॉ शशिधारा का कहना है कि, "लाइब्रेरी में जो पुस्तकें हैं वो वाकई में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। यहां तक की जो पुस्तकें वहां पर हैं उनमें से बहुत सी हमारे खुद के संस्थान बल्कि पुणे विश्वविद्यालय में भी नहीं होंगी।" 
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