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जांच या खानापूर्ति: 900 की आबादी, 25 के सैंपल लेने गांव में गए डॉ. साहब, ऐसे ढूंढेंगे कोरोना

Mon, 17 May 2021 08:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यूपी के कई जिलों में गांव-गांव में कोरोना जांच कराई जा रही है, लेकिन जिस ढंग से यह हो रही है, उससे लगता है कि यह औपचारिकता बन गई है। डॉक्टर साहब मात्र आधे घंटे के लिए गांव में जाते हैं और उन्हें घेरकर खड़े हो रहे हैं 200 लोग।
 
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कोरोना वायरस: जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के आजमगढ़, जौनपुर, बनारस, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ के कई जिलों की कहानी यही है। गांव खालिसपुर, जौनपुर के प्रकाश बताते हैं कि उनके गांव में कल एक डॉ. साहब 25 लोगों की जांच के प्रबंध के साथ आए थे। 900 लोगों की आबादी वाले इस गांव में काफी लोग सर्दी, जुकाम से पीड़ित हैं। लेकिन डॉ. साहब के पास कोरोना की जांच के साधन केवल 25 लोगों के ही थे। वे आनन-फानन में जांच करके चले गए। 

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सुल्तानपुर के अरुण तिवारी बताते हैं कि उनके गांव में कुछ लोगों की जान चली गई है। कई लोग बीमार हैं, लेकिन केवल उन्होंने कोरोना का टेस्ट कराया और पॉजिटिव हैं। तिवारी का कहना है कि अभी उनके गांव में व्यापक जांच हुई ही नहीं है।

भगवान भरोसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
माल्टारी, आजमगढ़ के संतोष कुमार का कहना है कि गांवों में पहली बात तो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भगवान भरोसे चल रहे हैं। ब्लॉक और तहसील स्तर पर ही चिकित्सक मिल पाते हैं। दूसरा यह कि कोरोना से जांच की उचित व्यवस्था नहीं है। लोग सर्दी जुकाम से पीड़ित हैं तो काढ़ा पीकर, देसी दवाई खाकर या फिर अखबार में छपी दवाई की सूची से दवा खरीदकर खा रहे हैं।  जांच-पड़ताल के नाम पर खानापूर्ति भी नहीं पूरी हो पा रही है। वह बताते हैं आसपास के एकाध गांव में डॉ. ने आना शुरू किया है। पूर्वांचल से लेकर सेंट्रल यूपी के तमाम गांवों में जांच पड़ताल की दशा यही है।
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गांवों में जांच गंभीर मामला, वायरस ट्रेस करना जरूरी
नेशनल कोविड टास्क फोर्स, आईसीएमआर के चेयरमैन डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि गांवों में कोरोना के संक्रमितों की जांच पड़ताल करके वायरस को ढूंढना जरूरी है। इससे वायरस के नए वैरिएंट और उसकी घातकता का पता चलेगा। 

हरियाणा के गांवों में भी हालात ठीक नहीं
डॉ. अरोड़ा भी मानते हैं कि हरियाणा के भी कई गांवों में हालात अभी ठीक नहीं है। उ.प्र. के गांवों में भी कोरोना की जांच एक चुनौती है। वह मानते हैं कि गांव के लोगों को कोरोना के बारे में खास कुछ पता नहीं है। दूसरे सामाजिक रीति रिवाज को गांव वाले बहुत महत्व देते हैं। वह मानते हैं कि कई गांवों में कोरोना के चलते मौते हुई हैं और सरकार के पास इसका ठीक-ठीक आंकड़ा नहीं है।

वायरस को ट्रेस करना बहुत मुश्किल
जिनोमिक्स के वैज्ञानिक अनुराग अग्रवाल कहते हैं कि कई टीमें वायरस का पता लगा रही हैं। हम जितना कर सकते हैं, कर रहे हैं। हालांकि गांवों में वायरस को ट्रेस करना बहुत मुश्किल हो रहा है। अनुराग कहते हैं कि अभी दो बातों का कोई दावा नहीं कर सकते। यह नहीं कहा जा सकता कि दूसरी लहर कब तक रहेगी और दूसरा यह नहीं बता सकते कि अभी कोरोना का संक्रमण कितना घातक हो सकता है।

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