नोबेल शांति पुरस्कार विजेता व बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा आयोजित 74वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित किया। इसमें उन्होंने दुनियाभर के स्वास्थ्य मंत्रियों और वैश्विक नेताओं से आह्वान किया कि वे कोविड-19 से प्रभावित गरीब, वंचित और हाशिये पर आए बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल आर्थिक सहायता और ठोस कार्रवाई करें।
वर्ल्ड हेल्थ असेंबली को ऑनलाइन संबोधित करते हुए सत्यार्थी ने स्वास्थ्य मंत्रियों से अपने देश में बच्चों के लिए विशेष बजट आवंटित करने और कार्य योजना बनाने के साथ-साथ टास्क फोर्स के गठन की मांग की।
लाखों बेजुबान बच्चों की आवाज बनकर आया: सत्यार्थी
वर्ल्ड हेल्थ असेंबली को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा, 'आज मैं यहां उन लाखों बेजुबान बच्चों की आवाज बनकर आया हूं, जो बच्चे पीछे छूट गए हैं। ये वही बच्चे हैं जिनके परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी में जीते आ रहे हैं। ये वही बच्चे हैं, जिन्हें मजदूरी करने या अपने जिस्म को बेचने के लिए मजबूर किया जाता है। ये वही बच्चे हैं जिन्हें सबसे खराब स्वास्थ्य परिणामों का सामना करना पड़ता है। ये वही बच्चे हैं जिन्हें शिक्षा से वंचित कर दिया जाता है और जिनका साफ पानी और स्वच्छता तक पहुंच बहुत कम है। ये वे बच्चे हैं जिन्हें दशकों से व्यवस्था ने पीछे छोड़ दिया है और जिसका उन्हें आज ज्यादा सामना करना पड़ रहा है।'
यह स्वास्थ्य व आर्थिक संकट ही नहीं न्याय व सभ्यता का संकट
मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि कोविड-19 महज स्वास्थ्य और आर्थिक संकट नहीं है, बल्कि यह 'न्याय का संकट, 'सभ्यता का संकट' और 'मानवता का संकट' भी है। 'फेयर शेयर फॉर चिल्ड्रेन' रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया के सबसे गरीब देशों को 2020 में कोविड-19 राहत पैकेज के 8 ट्रिलियन डॉलर में से महज 0.13 प्रतिशत यानी तकरीबन 10 बिलियन डॉलर मदद के लिए दिया गया। बाकी पैसा बड़े कारपोरेट घरानों को उबारने के लिए दे दिया गया।
14 करोड़ बच्चे व परिवार गरीबी के दलदल में आए
सत्यार्थी ने कहा कि दुनिया की दो-तिहाई सबसे बड़ी कंपनियों ने 2020 में 109 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा कमाया। जबकि इसी दौरान महामारी के परिणामस्वरूप तकरीबन 14 करोड़ बच्चे और उनका परिवार अत्यधिक गरीबी के दलदल में धकेल दिए गए हैं और भारी संख्या में बच्चों को बाल मजदूर बनाकर उनका शोषण किया जा रहा है। दशकों में पहली बार बाल श्रम में वृद्धि की आशंका है।
बच्चों को बचाने के ठोस उपाय करना होंगे
अपनी समापन टिप्पणी में श्री कैलाश सत्यार्थी ने भावुक होते हुए कहा, 'मुनाफा, राजनीति और संपत्ति इंतजार कर सकती है, लेकिन हमारे बच्चे नहीं। उनकी आजादी, सुरक्षा और बचपन अब और इंतजार नहीं कर सकते। अगर हम बच्चों को पीछे छोड़ देते हैं, तो स्वास्थ्य सेवा में हमारा कोई भी निवेश एक पीढ़ी और दूसरी पीढ़ी के बीच की खाई के माध्यम से विफल हो जाएगा। महामारी ने दुनिया में जो तबाही मचाई है, उससे बच्चों को बचाने के लिए हमें उन्हें साथ में लेना होगा।'
तीसरी कोरोना लहर की ओर ध्यान आकृष्ट किया
बच्चों पर कोविड़-19 महामारी के पड़ने वाले व्यापक असर को देखते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सभी एजेंसियों को एक साथ मिल कर काम करने और इंटर एजेंसी हाई लेवल ग्रुप बनाने का सुझाव दिया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को प्रभावित करने वाली कोरोना की तीसरी लहर की आशंका की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
सत्यार्थी ने कोविड-19 रोधी वैक्सीन के लिए समर्थन जुटाने, बच्चों के टीकाकरण और टीकों पर बौद्धिक संपदा प्रतिबंधों में छूट के साथ-साथ महामारी से प्रभावित बच्चों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से बचाने के लिए तय समय सीमा में लक्षित अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय कार्य योजनाएं बनाने पर जोर दिया।
हर साल जिनेवा में होता है आयोजन
डब्ल्यूएचओ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था वर्ल्ड हेल्थ हेल्थ असेंबली हर साल स्विटजरलैंड के जिनेवा में आयोजित की जाती है। इसमें डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्यीय देशों के स्वास्थ्य मंत्री और अन्य वैश्विक नेता भाग लेते हैं। असेंबली में ही दुनिया के स्वास्थ्य मुद्दों पर चर्चा होती है और उसके अनुरूप नीतियां बनाने पर विचार किया जाता है।
विश्वव्यापी कोविड-19 संकट के चलते ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इस वर्ल्ड हेल्थ असेंबली को इस बार ऑनलाइन आयोजित किया गया। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई विश्व नेताओं ने भाग लिया।